सुपर स्पेशिलिटी चिकित्सा सेवाओं में बढ़ते SMS के कदम, कॉलेज के चार विभागों में शैक्षणिक सत्र वर्ष 2024-25 में शुरू होंगे कोर्स, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: हर साल लाखों मरीजों के ट्रीटमेंट को लेकर चर्चाओं में रहने वाले SMS मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशिलिटी चिकित्सा सेवाओं का दायरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है.नेशनल मेडिकल कमिशन ने हाल ही में कॉलेज के चार विभागों में शैक्षणिक सत्र वर्ष 2024-25 से पीजी-डीएम के कोर्स को मंजूरी दी है.इससे एक तरफ जहां विभिन्न तरह की गंभीर बीमारियों के लिए स्पेशिलिटी चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध होंगी, साथ ही हर साल दस नए विशेषज्ञ चिकित्सक भी तैयार होंगे.प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस मेडिकल कॉलेज में शैक्षणिक स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है.

चाहे बुजुर्गों की स्पेशल केयर हो या बच्चों में किडनी की दिक्कतें.इन सभी बीमारियों के लिए पिछले दिनों में खोले गए डेडिकेटेड विभागों में अब मेडिकल स्टूडेंट को पढ़ाई का मौका भी मिलेगा.कॉलेज के प्रस्तावों को नेशनल मेडिकल कमिशन ने मंजूरी दी है, जिसके चलते शैक्षणिक सत्र वर्ष 2024-25 से जिरियाट्रिक मेडिसिन विभाग में PG,सर्जिकल गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी में MCH, क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी एण्ड रूमेटोलॉजी,पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी में DM कोर्स शुरू होंगे.कॉलेज प्राचार्य डॉ दीपक माहेश्वरी और अधीक्षक डॉ सुशील भाटी ने इस उपलब्धि के लिए टीम वर्क को श्रेय दिया और कहा कि हमारी कोशिश है कि एसएमएस वो इंस्टीट्यूट बने, जहां देशभर के सभी मेडिकल कोर्स संचालित किए जाते हो.

विभाग को मिली उपलब्धि से मरीजों को ये राहत:

पेडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी :  2 डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन सीट्स
फायदें : देश में दिल्ली एम्स और बेंगलूरु मेडिकल कॉलेज के बाद SMS तीसरा ऐसा इंस्टीट्यूट, जहां पेडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी में डीएम कोर्स शुरू होगा.इस कोर्स के शुरू होने से बच्चों की किडनी से जुड़ी बीमारियों के इलाज और शोध की राह आसान होगी.

जिरियाट्रिक मेडिसिन विभाग : दो पीजी सीट्स
फायदें : सीएम भजनलाल शर्मा ने चिकित्सा क्षेत्र की प्राथमिकताओं में बुजुर्गों की केयर को शामिल किया है.इन सीट्स के आवंटन से प्रदेश में वृद्धजन स्वास्थ्य के विशेषज्ञ तैयार हो सकेंगे, साथ ही बुजुर्गों की बीमारियों को लेकर डेडिकेटेड शोध को भी बढ़ावा मिलेगा.

क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी एण्ड रूमेटोलॉजी विभाग : 2 DM सीट्स
फायदें : आमतौर पर विशेषज्ञों की कमी के चलते लोग अभी भी हड्डी रोग और गठिया रोग को एकसमान ही देखते है.लेकिन अब राजस्थान में पहली बार किसी कॉलेज में DM रूमेटोलॉजी कोर्स शुरू होगा, जिससे गठित रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर होगी.जैसे ही विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार होंगे, तो लोगों में भी बीमारी के प्रति जागरूता बढ़ेगी.

सर्जिकल गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग : 3 MCH सीट्स
फायदें : अंगदान की मुहिम को बढ़वा देने में ये अहम कदम माना जा रहा है.सर्जिकल गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग में 3 MCH की सीट्स आने से लीवर ट्रांसप्लांट को गति मिलेगी. नेशनल मेडिकल कमिशन में एसएमएस मेडिकल कॉलेज के अभी कई प्रस्ताव लम्बित है.कॉलेज प्राचार्य डॉ दीपक माहेश्वरी की माने तो इन प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी में भी डीएम कोर्स शुरू हो सकेंगे.इसके साथ ही पैलिएटिव मेडिसिन डिपार्टमेंट में भी एमडी की सीट्स में बढ़ोत्तरी की उम्मीद है.