जयपुर: इस साल नवंबर में हो सकते है 'एक राज्य एक चुनाव' के तहत ग्राम पंचायत और पंचायत समिति चुनाव यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने विधानसभा में यह बात कही. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि बिना किसी नियम कानून के चुनाव को आगे ले जा रही सरकार कोई इनके पास प्लान नहीं है. यह लोग चुनाव कराने की स्थिति में इसलिए नहीं है क्योंकि प्रदेश के अंदर उनकी हालत खराब है. उधर बीजेपी संगठन ने एक राष्ट्र एक चुनाव की दिशा में जन जागरण अभियान राजस्थान में शुरू कर दिया.
एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा भारत में नई नहीं है. संविधान को अंगीकार किए जाने के बाद, 1951 से 1967 तक लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ आयोजित किए गए थे. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के पहले आम चुनाव 1951-52 में एक साथ आयोजित किए गए थे. यह परंपरा इसके बाद 1957, 1962 और 1967 के तीन आम चुनावों के लिए भी जारी रही. हालांकि, कुछ राज्य विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण 1968 और 1969 में एक साथ चुनाव कराने में बाधा आई थी.
चौथी लोकसभा भी 1970 में समय से पहले भंग कर दी गई थी, फिर 1971 में नए चुनाव हुए. पहली, दूसरी और तीसरी लोकसभा ने पांच वर्षों का अपना कार्यकाल पूरा किया. जबकि, आपातकाल की घोषणा के कारण पांचवीं लोकसभा का कार्यकाल अनुच्छेद 352 के तहत 1977 तक बढ़ा दिया गया था. इसके बाद कुछ ही, केवल आठवीं, दसवीं, चौदहवीं और पंद्रहवीं लोकसभाएं अपना पांच वर्षों का पूर्ण कार्यकाल पूरा कर सकीं.. जबकि छठी, सातवीं, नौवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं और तेरहवीं सहित अन्य लोकसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया गया.
इन घटनाक्रमों ने एक साथ चुनाव के चक्र को बाधित किया, जिसके कारण देश भर में चुनावी कार्यक्रमों में बदलाव का मौजूदा स्वरूप सामने आया है. भारत सरकार ने 2 सितंबर 2023 को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक साथ चुनाव कराने पर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था. इसका प्राथमिक उद्देश्य यह पता लगाना था कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराना कितना उचित होगा. एक साथ चुनाव कराने से कई चुनाव चक्रों से जुड़े वित्तीय खर्च में काफी कमी आ सकती है. यह मॉडल प्रत्येक व्यक्तिगत चुनाव के लिए मानव-शक्ति, उपकरणों और सुरक्षा संबंधी संसाधनों की तैनाती से संबंधित व्यय को घटाता है.
राजस्थान विधानसभा में ये मसला आज गूंजा राजस्थान में 'एक राज्य एक चुनाव' के तहत ग्राम पंचायत और पंचायत समिति के चुनाव नवंबर 2025 में हो सकते हैं. बुधवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने यह उम्मीद जताई.प्रश्नकाल के दौरान बीजेपी विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने प्रदेश में ' एक राज्य एक चुनाव' के तहत होने वाले चुनाव की कार्य प्रगति को लेकर सवाल किया, जिस पर मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा राज्य एक चुनाव विधि की तैयारी की जा रही है, मंत्रिमंडल समिति गठित की गई है. समिति बैठकों के जरिये सुझाव लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है. रिपोर्ट के आधार पर कार्य किया जाएगा.
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली एक राज्य एक चुनाव नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि खर्रा साहब जवाब देने में एक्सपर्ट है तो उन्होंने कह दिया की पंचायत राज ने अपने हिसाब से कर दिया हमने अपने हिसाब से कर दिया पर यह हिसाब चलने वाला नहीं है सरकार एक है और दोनों ही जो संशोधन 73वां संशोधन और 74वां संशोधन उसके नियमों की यहां अवहेलना की जा रही है.
बिना किसी नियम कानून के चुनाव को आगे सरकार ले.जा रही कोई इनके पास प्लान नहीं है ना किसी भी प्रकार की उनकी आने वाले भविष्य की कोई कार्य योजना नहीं है सिर्फ और सिर्फ यह लोग चुनाव कराने की स्थिति में इसलिए नहीं है क्योंकि प्रदेश के अंदर उनकी हालत खराब है इसलिए चुनाव कराने से बच रहे हैं जबकि 5 साल का संविधान के अंदर प्रावधान है.
उधर बीजेपी संगठन ने भी एक राष्ट्र एक चुनाव जन जागरूकता अभियान शुरू कर दिया आज एक प्रदेश संयोजक सुनील भार्गव ने प्रेसवार्ता की और . सुनील भार्गव ने बताया कि भारत में एक साथ चुनाव कराने के संबंध में उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट को 2024 में जारी किया गया था. रिपोर्ट ने एक साथ चुनाव के दृष्टिकोण को लागू करने के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रदान की. इसकी सिफारिशों को 18 सितंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकार किया गया, जो चुनाव सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.