Delhi Election Results 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर काउंटिंग शुरू, मॉनिटर करने के लिए तैनात की गई 5 हजार लोगों की टीम

Delhi Election Results 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर काउंटिंग शुरू, मॉनिटर करने के लिए तैनात की गई 5 हजार लोगों की टीम

नई दिल्लीः दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आज आएंगे. सुबह 8 बजे से काउंटिंग शुरू हो गई है. मतगणना के लिए कुल 70 स्ट्रांग रूम बनाए गए. हर एक विधानसभा क्षेत्र के लिए 19 जगहों पर स्ट्रांग रूम बनाए गए है. काउंटिंग मॉनिटर करने के लिए 5 हजार लोगों की टीम तैनात की गई है. साफ सुथरे काउंटिंग प्रोसेस के लिए VVPAT का रेंडम सिलेक्शन होगा. प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 5 वोटर VVPAT का रेंडम सिलेक्शन किया जाएगा.  

पिछले 3 चुनावों के मुकाबले इस बार कम वोटिंग हुई. दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार 60.54% लोगों ने वोट डाले. साल 2013 में 65.63% वोटिंग हुई थी. 2015 में 67.12% और 2020 में 62.59% वोटिंग हुई थी. AAP ने 2013 में कांग्रेस के समर्थन से पहली बार सरकार बनाई थी. हालांकि गठबंधन नहीं चला और उसके बाद 2015 और 2020 में हुए चुनाव में AAP ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई. 

18% स्विंग वोटर्स किंगमेकरः
विस चुनाव में करीब 18% स्विंग वोटर्स किंगमेकर साबित होते है. लोकसभा चुनाव के करीब 9 महीने बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव होते है. इतने कम वक्त में ही वोटिंग ट्रेंड में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. 2024 लोकसभा चुनाव में दिल्ली की 7 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी. INDI गठबंधन में AAP के 4 और कांग्रेस ने 3 प्रत्याशियों की हार हुई थी. भाजपा को कुल 54.7%, जबकि INDIA ब्लॉक को 43.3% वोट मिले. सभी सीटों पर जीत-हार का मार्जिन औसतन 1.35 लाख रहा था 

70 सीटों पर हुआ 60.54% मतदानः
5 फरवरी को 70 सीटों पर 60.54% मतदान हुआ था. वोटिंग के बाद 14 एग्जिट पोल में से 12 में भाजपा सरकार बन रही थी जबकि 2 एग्जिट पोल में केजरीवाल की सरकार बनने का अनुमान जताया गया. भाजपा की सरकार बनी तो दिल्ली में 27 साल बाद सत्ता में वापसी होगी. इससे पहले 1993 में भाजपा ने 49 सीटें जीतीं और 5 साल में 3 CM बनाए थे. 

कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहींः
कांग्रेस का दो चुनावों में खाता नहीं खुला है. 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने सिर्फ 8 सीटें जीती थी. 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का खाता नहीं खुला. ऐसे में 10 साल बाद पार्टी की कोशिश है कि उसका खाता खुले. कांग्रेस की ओर से शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित, प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव और अलका लांबा जैसे चेहरे चुनाव मैदान में है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है. एक भी विधायक चुनकर आने पर विधानसभा में 10 साल बाद कांग्रेस का प्रतिनिधि होगा. 

एग्जिट पोल भी इस बार दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने का अनुमान लगा रहे है. ऐसे में इसके बाद आज चुनाव परिणाम में ये तस्वीर साफ हो जाएगी की दिल्ली में किसकी सरकार और कौन विपक्ष का मोर्चा संभालेगा.