VIDEO: लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि का मामला, विधानसभा में फिर हो सकती है गहमागहमी, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर : लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि को लेकर पूर्व में विधानसभा में प्रस्तुत किए बिल को लेकर फिर गहमागहमी तेज हो सकती है. कई खामियों के चलते पिछली बार विधानसभा में अटके इस बिल को लेकर नोटिस ऑफ अमेंडमेंट के जरिये कवायद तेज हो सकती है. 

हर बार जब भी भाजपा सरकार सत्ता में आती है तो डीआईआर और मीसा बंदियों की पेंशन और अन्य सुविधाएं बहाल होती हैं और कांग्रेस सरकार के सत्तारुढ़ होने पर ये सुविधाएं वापस ले ली जाती हैं. इस पीड़ा को समझते हुए भजनलाल सरकार लोकतंत्र सेनानियों की पेंशन और अन्य सुविधाओं के लिए संवैधानिक प्रावधान करने जा रही थी लेकिन इस मंसूबे पर पहले पानी फिर गया था और ऐसे में अब नए सिरे से इसे लेकर एक्सरसाइज संभव है. 

क्या रह गईं थीं खामियां ?
- इस बिल के जरिये आपातकाल के दौरान डीआईआर और मीसा बंदियों की पेंशन और अन्य सुविधाओं के लिए संवैधानिक प्रावधान किया जाना था.
- इसके जरिये लोकतंत्र सेनानियों को पेंशन के रूप में 20 हजार रुपये प्रति माह और चिकित्सा सहायता के रूप में 4000 रुपये तक की राशि होनी थी सुनिश्चित. 
- लेकिन इस बिल में कई खामियां छूट गईं थी जिसके चलते यह बिल अटक गया. 
- इनमें प्रमुख खामी यह थी कि लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि नियम 2008 में संशोधन हुआ था जिसके जरिये डीआईआर व मीसा बंदियों को ही नहीं, सीआरपीसी की 107,116,151 धारा में बंद रहे या कम से कम 1 माह तक निरुद्ध रहे लोकतंत्र सेनानियों को भी पेशन और मेडिकल सुविधा दी गई थी. 

इसके लिए 4 जुलाई 2018 को आदेश जारी किया गया था. 
- इसके साथ ही लोकतंत्र सेनानी की मृत्यु के 90 दिन बाद प्रार्थी पत्नी व आश्रित को पेंशन के लिए आवेदन करना जरूरी था जिसमें विसंगति के कारण बाद में संशोधन किया गया था जिसमें यह अनिवार्यता समाप्त कर दी थी.
- यहां तक कि जालोर में तत्कालीन जिला प्रमुख की पत्नी आनंदी के लोकतंत्र सेनानी पति की मौत 2013 में हुई थी लेकिन तब संशोधन न होने से वह पात्र नहीं थी लेकिन जब संशोधन होने के बाद उन्होंने आवेदन किया तो उनके आवेदन को यह कहते हुए निरस्त कर दिया गया था कि मृत्यु के 90 दिन के अंदर आवेदन नहीं किया गया था. 
- इस बहुचर्चित केस के बाद इसमें अहम संशोधन प्रस्तावित था कि मृत्यु पहले होने और संशोधन बाद में होने की स्थिति आए तो ऐसे मामले में प्रार्थी को पेंशन के लिए पात्र माना जाए. 
- साथ ही आपातकाल के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाबालिग थे जिन्हें जेल में बंद किया गया था और पेंशन के प्रावधान नाबालिग होने से उन्हें पेंशन नहीं मिल सकती. 
- ऐसे में यह संशोधन शामिल करते हुए बिल पास करना लाजिमी है. 
- इन सबके साथ लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों का दर्जा देते हुए उनकी तरह राजकीय सम्मान से अंत्येष्टि और अन्य सुविधाओं की मांग सबसे ऊपर है. 
- इस बारे में संशोधन करके इस प्रावधान को शामिल करना भी जरूरी है लेकिन विधानसभा को भेजे गए बिल में इस संशोधन को छोड़ दिया गया. 
- स्वतंत्रता सेनानियों का दर्जा मिलने पर ही रोडवेज में साधारण,एक्सप्रेस के साथ अन्य बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा और लोकतंत्र सेनानी के साथ एक सहयात्री को भी नि:शुल्क यात्रा की सुविधा देने की मांग अपने आप पूरी हो जाएगी. 

 

सदन की संपत्ति होने के चलते अब यह बिल वापस होने की प्रक्रिया खासी लंबी है,लेकिन सदन में नोटिस ऑफ अमेंडमेंट देकर और जरूरी संशोधन करके सावधानीपूर्वक फिर बिल सदन में भेजा जा सकता है.