लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश, किरेन रिजिजू बोले- बिल नहीं लाते तो संसद भवन भी वक्फ का हो जाता, बोर्ड में 2 महिला सदस्य जरूरी

लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश, किरेन रिजिजू बोले- बिल नहीं लाते तो संसद भवन भी वक्फ का हो जाता, बोर्ड में 2 महिला सदस्य जरूरी

नई दिल्लीः लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश किया गया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल पेश किया. उन्होंने ज्वाइंट कमेटी के मेंबर्स को धन्यवाद दिया. कहा कि संसदीय इतिहास में किसी बिल पर इतनी चर्चा नहीं हुई. 97 लाख से अधिक सुझावों को सरकार ने देखा. JPC में वक्फ बिल पर व्यापक चर्चा हुई. 25 राज्यों के वक्फ बोर्ड ने सुझाव दिए. कानून के जानकारों से भी सुझाव लिए गए. 284 प्रतिनिधिमंडल ने अलग-अलग पक्षों से बात की. 

बिल में पहले भी संशोधन की कोशिश हुई है. 2013 में वक्फ बोर्ड के नियमों में बदलाव हुआ है. एक कानून दूसरे कानून से ऊपर नहीं हो सकता है. UPA सरकार ने दिल्ली की 123 संपत्ति वक्फ को दी. हमने संशोधन किया तो इसे गैर-संवैधानिक कहा जा रहा है. पहले कभी वक्फ बिल को गैर-संवैधानिक नहीं कहा गया. वक्फ बिल पर विपक्ष का मन साफ नहीं है.  

बिल किसी धर्म के खिलाफ नहींः
बिल नहीं लाते तो संसद भवन भी वक्फ का हो जाता. मोदी सरकार नहीं आती तो पता नहीं कितनी संपत्ति दे देते. वक्फ संशोधन बिल किसी धर्म के खिलाफ नहीं है. सरकार कोई धार्मिक व्यवस्था नहीं बदल रही है. वक्फ का संबंध संपत्ति से जुड़ा हुआ है. ये सिर्फ संपत्ति के मैनेजमेंट का विषय है. हम किसी मस्जिद के प्रबंधन में दखल नहीं दे रहे है. 5 मार्च 2014 को प्राइम प्रॉपर्टी को UPA सरकार ने वक्फ बोर्ड को दी. UPA सरकार को लगा था कि ऐसा करके वोट प्राप्त होंगे. लेकिन जनता समझदार है. 

वक्फ बोर्ड में 2 महिला सदस्य जरूरीः
वक्फ बोर्ड में मुसलमानों के सभी वर्गों के सदस्य होंगे. वक्फ बोर्ड में 1 सदस्य बार काउंसिल से होगा. वक्फ बोर्ड में 2 महिला सदस्य जरूरी है. वक्फ बोर्ड में 3 सांसद होंगे. वक्फ बोर्ड में 10 सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे. वक्फ बोर्ड में 2 प्रोफेशनल्स होंगे. वक्फ बोर्ड में 4 गैर मुस्लिम सदस्य होंगे. दुनिया में सबसे अधिक वक्फ संपत्ति भारत में है. 

कैबिनेट ने बिल को मंजूर किया- अमित शाह
लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वक्फ बिल JPC को भेजा गया था. कैबिनेट ने बिल को मंजूर किया है. हमारी कमेटी कांग्रेस जैसी नहीं, हमारी कमेटियां लोकतांत्रिक है. इस सरकार में कमेटी चर्चा करती है. वहीं स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि मैंने गैर सरकारी और सरकारी संशोधनों को समय दिया है. मैंने दोनों में कोई अंतर नहीं किया है.