जयपुर: उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बुधवार को राजस्थान के बजट में वन एवं वन्य जीव संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की. इस वर्ष प्रधानमंत्री द्वारा प्रारम्भ किए गए एक पेड़ मां के नाम अभियान से प्रेरित होकर राज्य में 7 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण किए गए हैं. आगामी वर्ष के लिए राज्य सरकार ने मिशन हरियाळो राजस्थान के तहत 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सके. इसके अलावा, किसानों और अन्य हितधारकों के उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार ने 'ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट' नीति और एग्रो फॉरेस्ट्री पॉलिसी की घोषणा की है.
इन नीतियों के तहत वन क्षेत्र के बाहर ग्रीन कवर को बढ़ाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाएगा. इस पहल से न केवल वन्यजीवों के संरक्षण में मदद मिलेगी, बल्कि किसानों को भी नई आय के स्रोत मिलेंगे. वन एवं वन्य जीव संरक्षण की कार्ययोजना का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने विभिन्न कार्यों की घोषणा की. प्रदेश के अधिसूचित बाघ परियोजना क्षेत्रों, जिनमें रणथम्भौर, सरिस्का, मुकुन्दरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और धौलपुर-करौली शामिल हैं, में बाघों के संरक्षण के लिए 35 करोड़ रुपये की लागत से बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा. इसमें चौकी, नाका और एंटी पोचिंग कैंप शामिल हैं, जो बाघों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण होंगे.
बाघ संरक्षित क्षेत्रों के अलावा, राज्य में वन्यजीव अभयारण्यों, कंजर्वेशन रिजर्व और प्रादेशिक वन क्षेत्रों में प्रे बेस की वृद्धि के लिए 30 करोड़ रुपये की लागत से 20 प्रे बेस ऑग्मेंटेशन एंक्लोजर स्थापित किए जाएंगे. इन कदमों से वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और उन्हें बेहतर निगरानी मिल सकेगी. इसके अलावा, घड़ियाल संरक्षण के दृष्टिकोण से, सवाई माधोपुर में पालीघाट के निकट एक घड़ियाल रियरिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा. यह कदम घड़ियालों की संख्या बढ़ाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा. सवाई माधोपुर-करौली क्षेत्र में, स्थानीय समुदायों और विशेषज्ञों की सहायता से विलुप्त हो रही सियागोश (Caracal) प्रजाति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जरूरी कार्य किए जाएंगे. साथ ही, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए सरकार ने पांच रेस्क्यू वाहन मय उपकरण उपलब्ध करवाने की घोषणा की है, ताकि समय पर वन्यजीवों को बचाया जा सके और उन्हें उपयुक्त स्थान पर ट्रांसलोकेट किया जा सके.
मुकुन्दरा राष्ट्रीय अभयारण्य में वन्यजीवों के लिए चम्बल नदी से पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी. इससे वन्यजीवों के लिए जल स्रोत की पर्याप्तता सुनिश्चित होगी. इसके अलावा, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना) भरतपुर में संरक्षण गतिविधियों के तहत विभिन्न कार्य किए जाएंगे, जिसमें इंटरनल रोड, पाल मरम्मत जैसी गतिविधियों के लिए 20 करोड़ रुपये की लागत से परियोजनाएं संचालित की जाएंगी.
अमरख महादेव-उदयपुर, गंगा भैरव घाटी-अजमेर और नाहरगढ़ अभयारण्य-जयपुर के बीड़ पापड़ क्षेत्र में लेपर्ड सफारी शुरू की जाएगी, जिससे पर्यटकों को वन्यजीवों के करीब जाने का अवसर मिलेगा और वन्यजीव संरक्षण में भी मदद मिलेगी. अंत में, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क कोटा में मास्टर प्लान के तहत 35 प्रजातियों के लिए शेष रहे 22 एन्क्लोजर बनाए जाएंगे, जिससे बायोलॉजिकल पार्क की क्षमता में वृद्धि होगी और विभिन्न वन्यजीवों को एक सुरक्षित आवास मिलेगा. इन घोषणाओं से राज्य में वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक सशक्त कदम उठाया जाएगा, जिससे न केवल जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी वन्यजीव संरक्षण में भागीदारी का अवसर मिलेगा.