जयपुर : मोहन भागवत भोपाल में विद्या भारती के एक कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज के हर क्षेत्र में तकनीक अपना प्रभाव डाल रही है. हमें टेक्नोलॉजी के लिए मानवीय नीति बनानी होगी.
तकनीक में जो अच्छा है, उसे स्वीकारना और लगत को छोड़ना होगा. विद्या भारती केवल शिक्षा प्रदान करने का कार्य नहीं करती. बल्कि समाज को सही दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. विश्व भारत की ओर देख रहा है उसे मानवता की दिशा देनी होगी. शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए. बल्कि इसे व्यापक दृष्टिकोण से देखना होगा. मानवता को सही दिशा देने के लिए आवश्यक है कि हमें अपने कार्य को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है. परिवर्तन आवश्यक है, क्योंकि संसार स्वयं परिवर्तनशील है.
लेकिन यह अधिक महत्वपूर्ण है कि परिवर्तन की दिशा क्या होनी चाहिए. विश्व में हो रहे सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक बदलावों को भारत की सनातन परंपरा के आलोक में दिशा देने की आवश्यकता है. आज जब वैश्विक परिदृश्य में कई विकृतियां उभर रही हैं. तब भारत ही वह ध्रुव तारा है जो सही दिशा प्रदान कर सकता है. इसके लिए समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए भारतीय परंपराओं पर आधारित शिक्षा, संस्कृति और नीति निर्माण को बढ़ावा देना आवश्यक है.
उन्होंने उल्लेख किया कि विद्या भारती द्वारा किए जा रहे कार्यों का वैश्विक स्तर पर प्रभाव देखा जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी इसकी व्यापकता को स्वीकार किया है. यह प्रमाणित करता है कि संघ और उसके सहयोगी संगठनों का कार्य केवल भारत तक सीमित नहीं है. बल्कि इसका वैश्विक महत्व भी है. आज के समय में तकनीक समाज के हर क्षेत्र में अपना प्रभाव डाल रही है. हमें टेक्नोलॉजी के लिए एक मानवीय नीति बनानी होगी.
आधुनिक विज्ञान और तकनीक में जो कुछ गलत है उसे छोड़ना पड़ेगा और जो अच्छा है, उसे स्वीकार कर आगे बढ़ना होगा. आज समाज में नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना आवश्यक है.हमें केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं रहना चाहिए. बल्कि मानवता, करुणा और सत्य जैसे मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित समाज का निर्माण करना चाहिए. आने वाले समय में भारत को एक आदर्श समाज मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना होगा. जो संपूर्ण विश्व को शांति और समरसता की ओर ले जाने में सक्षम हो.
भारत की सांस्कृतिक विशेषता पर जोर देते हुए कहा कि हमें विविधता में एकता बनाए रखनी होगी. भारत की संस्कृति ने हमेशा सभी को जोड़ने का कार्य किया है. और इसे बनाए रखना हमारा कर्तव्य है, सब में मैं हूं, मुझ में सब हैं. इस कार्यक्रम में संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, विद्या भारती के अध्यक्ष डी. रामकृष्ण राव, महामंत्री अवनीश भटनागर सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे.