जयपुर: विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान आज दो सवालों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस हुई. विभागीय मंत्रियों ने सवालों पर आश्वस्त किया कि कार्रवाई की जाएगी. जबकि कुछ सवालों पर वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं होने का हवाला भी दिया. आखिर क्या कुछ रहा प्रश्नकाल के दौरान.
प्रश्नकाल की कार्रवाई पुलिस कर्मियों के मेस भत्ते में वृद्धि के सवाल के साथ शुरू हुई. विधायक भैराराम चौधरी के सवाल पर मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि सरकार समय-समय पर पुलिसकर्मियों के अलावा सभी कर्मचारी विशेष ध्यान रखकर भत्ता बढ़ती रही है. इसके बाद विधायक अमीन कागजी के किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में उचित मूल्य की दुकान के जुड़े सवाल पर मंत्री और विधायक में बहस हुई. आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े सवाल पर उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और विधायक रोहत बोहरा में तीखी बहस हुई.
पुलिस कर्मियों के मेस भत्ते में वृद्धि से जुड़े सवाल पर गृह मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि सरकार समय-समय पर पुलिसकर्मियों के अलावा सभी कर्मचारी विशेष ध्यान रखकर भत्ता बढ़ती रही है. मैं विश्वास दिलाना चाहता हूं कि सुरक्षा के लिए जो भी आवश्यकता महसूस होगी. सरकार समय-समय पर वित्तीय संसाधनों के आधार पर उपलब्ध कराते हुए आंतरिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने का प्रयास करते रहेंगे. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के सवाल पर कहा कि साप्ताहिक अवकाश का प्रावधान नहीं है लेकिन हम पुलिस कर्मियों को जो अवकाश साल भर में देते हैं वह अन्य सेवाओं के कर्मचारियों को मिलने वाले आकस्मिक अवकाश से ज्यादा हैं. अन्य को 15 दिन का मिलता है जबकि पुलिसकर्मियों को 25 दिन का अवकाश मिलता है. पूर्व DGP ने जो आदेश दिया था वह पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मात्र एक थाने के लिए था.
प्रदेश में नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थापना का सवाल करते हुए विधायक रोहित बोहरा ने आरोप लगाया कि पिछली बजट घोषणा के अनुसार एक भी पैसा खर्च नहीं किया है. विभागीय मंत्री दीया कुमारी ने जवाब दिया कि वित्त विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रथम चरण में राज्य सरकार ने 365 आंगनबाड़ी केंद्रों को आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों में विकसित करने हैं कि वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है आंगनबाड़ी केंद्रों को आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों के रूप में विकसित करने का काम शुरू कर दिया गया है. 2000 आंगनबाड़ी केंद्रों में सुविधा विकसित करने के लिए रिपोर्ट चाहिए गई है इसके लिए पत्रावली वित्त विभाग को भिजवाया जा चुका है.
किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में उचित मूल्य की दुकान से जुड़े सवाल पर विधायक अमीन कागजी और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा में नोक-झोक हुई. गोदारा ने जवाब दिया कि उचित मूल्य की दुकान की जांच में दोषी पाए जाने पर निलंबित की जाती है, इसके चलते ही किशनपोल क्षेत्र में 15 निलंबित की गई...विधायक ने कहा कि निलंबित दुकानों को किस मापदंड पर फिर से शुरू किया गया जबकि इनमें भारी कमियां थी. मंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में आवंटन सलाहकार समिति बनाई गई, लेकिन जयपुर में नहीं बनी. उस दौरान कागजी विधायक थे और उन्होंने समिति नहीं बनाई. जयपुर में भी जल्द समिति का गठन किया जाकर किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में भी रिक्त दुकानों को भरा जाएगा.
प्रदेश में श्रमिकों के लिए योजना को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सवाल किया कि हमारी सरकार ने जो गिग वर्कर्स कानून बनाया था उसके नियम कब तक लागू करने का विचार रखती है. श्रम मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार गिग वर्कर्स के लिए 2023 में 200 करोड़ का कोष बनाने की घोषणा की थी. गिग वर्कर्स के लिए नियम बनाने का मामला मंत्रिमंडलीय उप समिति के पास विचाराधीन है. वर्तमान सरकार ने 350 करोड़ की घोषणा गिग वर्कर्स के लिए की है. जल्द गिग वर्कर्स के लिए घोषणा सरकार जल्द लागू करेगी.
चंबल घड़ियाल अभ्यारण में गंदे पानी से जलीय जंतुओं पर दुष्प्रभाव के सवाल विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन का प्रावधान किया गया है . एक्सपर्ट कमेटी के गठन के पश्चात प्रस्ताव आने पर परीक्षण कर करके सरकार उस पर अग्रिम कार्रवाई करेगी. DFO संरक्षण राष्ट्रीय उद्यान कोटा ने आयुक्त नगर निगम को पत्र लिखा गया है.
जिसमें चंबल नदी में शहर से आने वाले गंदे पानी और सीवर को लेकर के उचित कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है ,मंत्री संजय शर्मा ने सदन के माध्यम से निर्देशित किया कोटा नगर निगम को, नगर निगम इस पर ठोस कदम उठाए और आने वाले समय में चंबल घड़ियाल परियोजना के अंदर जो भी पार्ट आता है ,उसमें सीवरेज का पानी है गंदा पानी नहीं जाए उसके लिए उचित कदम उठाए.
पुष्कर में ब्रह्मा मंदिर के लिए स्वीकृत राशि के सवाल पर पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने कहा कि ब्रह्मा मंदिर कॉरिडोर और सरोवर परिक्रमा मार्ग के विकास का प्रोजेक्ट को स्वदेश टू के अंदर भारत सरकार को भेजा है ,संभावना है जल्दी स्वीकृति मिलेगी, स्वीकृति के बाद ही डीपीआर बनाने का काम शुरू होगा, भारत सरकार बजट नहीं देती तो राज्य सरकार इसमें सरकार भी प्रावधान करेगी . विभिन्न सरकारी विभागों के द्वारा इसमें व्यवस्था की जाएगी.