VIDEO: पशोपेश में खेल संघ और खिलाड़ी ! खेल परिषद के आदेश से संकट में खेल संघ, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: खेल परिषद व रजिस्ट्रार सहकारिता के रवैये के चलते प्रदेश के कई खेल संघ व खिलाड़ी दुविधा में है. रजिस्ट्रार सहकारिता जहां दो दशक से नए खेल संघों को रजिस्टर्ड नहीं कर रहा है, वहीं खेल परिषद अपने द्वारा ही मान्यता दिए गए खेल संघों को मानने से इनकार कर रहा है. हालांकि इन खेलों को भारतीय ओलंपिक संघ से मान्यता प्राप्त है, लेकिन राजस्थान में खेल परिषद ने इनको मानने से इनका कर दिया. आखिर ऐसे खेलों के खिलाड़ी जाए तो जाए कहां ? 

कोर्ट के एक आदेश के हवाले से खेल परिषद ने डाला परेशानी में
प्रदेश के कई खेल संघों व खिलाड़ियों को परेशानी में डाला
खेल परिषद ने सभी खेल अधिकारियों व प्रभारियों को दिया निर्देश
खेल कानून के अंतर्गत अपंजीकृत खेल संघों के लिए दिया निर्देश
राजस्थान शब्द या  जिले का नाम उपयोग नहीं कर सकेंगे ऐसे खेल संघ
राजस्थान खेल अधिनियम - 2005 की धारा 25 (1)(2)  के प्रावधानों का दिया हवाला
उच्च न्यायालय के एक फैसले की अनुपालना में खेल परिषद ने जारी किए आदेश

--- राजस्थान क्रीड़ा अधिनियम - 2005 की धारा 25 (1)(2) के अनुसार---
1 कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह या तो व्यक्तिशः या सामूहिक रूप से किसी राज्य स्तरीय क्रीड़ा संगम द्वारा प्राधिकृत हुए बिना किसी भी खेल या क्रीड़ा में राजस्थान राज्य का प्रतिनिधितत्व नहीं करेगा या प्रतिनिधितत्व करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जायेगा.

2 कोई भी क्रीड़ा संगम अपने नाम के भागरूप में शब्द राजस्थान का उपयोग करने या किसी जिले के नाम का उपयोग करने या ऐसे किसी क्रीड़ा क्रियाकलाप का जिम्मा लेने का हकदार नहीं होगा जो भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तात्पर्यित किसी भी राष्ट्रीय संगम बोर्ड या संगम की किसी जिले का प्रतिनिधितत्व करने के रूप में परिणत हो, जब तक कि ऐसा क्रीड़ा संगम इस अधिनियम के अधीन किसर राज्य स्तरीय क्रीड़ा संगम इस अधिनियम के अधीन किसी राज्य स्तरीय क्रीड़ा संगम या किसी जिला स्तरीय क्रीड़ा संगम के रूप में रजिस्ट्रीकृत नहीं हो.

3 जो कोई उपर्युक्त उप धारा (1) और (2) के उपबन्धों का उल्लघंन करता है वह दोषसिद्धि पर ऐसी अवधि के कारावास से, जो छह मास से अधिक की नहीं होगी या जुर्माने से या दोनों दण्डनीय होगा.

2005 में खेल कानून लागू हुआ था प्रदेश में
तब 40 खेल संघों की सूची जारी की गई थी
40 में से भी कुछ खेल संघों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया
पिछले दो दशक में इस सूची में नहीं किया गया कोई बदलाव
40 के अलावा भी नए खेल संघ आ गए देश-प्रदेश में
नए खेल संघों ने खेल परिषद व रजिस्ट्रार सहकारिता को किया आवेदन
मान्यता देने व रजिस्ट्रेशन करने का दिया था आवेदन
इनमें से कुछ खेल संघों को भारतीय ओलंपिक संघ से है मान्यता
लेकिन रजिस्ट्रार सहकारिता ने एक भी नए खेल संघ को रजिस्टर्ड नहीं किया
खेल परिषद ने अप्रैल 2018 में 11 नए खेल संघों को मान्यता दी थी
रोलबॉल संघ, टेनीकोईट संघ, बॉल बैडमिंटन संघ, हॉकी राजस्थान
आट्या पाट्या संघ, सेपक टकरा संघ, तलवारबाजी संघ
केनापिंग व कयाकिंग संघ, वुशू संघ, ट्राइथलॉन संघ व
स्क्वैश रैकेट संघ को मान्यता दी थी राज्य खेल परिषद ने
खेल परिषद ने रजिस्ट्रार सहकारिता को भी लिखा था रजिस्ट्रेशन के लिए लिखा था पत्र
लेकिन रजिस्ट्रार ने एक भी खेल संघ को रजिस्टर्ड नहीं किया

अब नया विवाद हॉकी के कारण हुआ है. राजस्थान हाईकोर्ट ने हॉकी के मामले में एक आदेश दिया है कि जो खेल संघ रजिस्टर्ड नहीं है वह राजस्थान शब्द का उपयोग नहीं कर सकता. खेल कानून के आधार पर यह निर्णय दिया गया है. हकीकत यह है कि पूरे देश में अब भारतीय हॉकी फैडरेशन की जगह हॉकी इंडिया को भारतीय ओलंपिक संघ से मान्यता है. अन्य राज्यों की तरह राजस्थान में भी हॉकी संघ का नाम हॉकी राजस्थान कर दिया, लेकिन खेल कानून के अंतर्गत जो 40 खेल संघों की सूची है, उसमें राजस्थान हॉकी संघ नाम है. खुद खेल परिषद अप्रैल 2018 में लिखे पत्र में स्पष्ट कर चुकी है कि राजस्थान हॉकी संघ को विलोपित किया जाए और हॉकी राजस्थान को रजिस्टर्ड किया जाए. 

खैर यह हॉकी को लेकर फैसला हुआ, लेकिन इसके आधार पर खेल परिषद ने पूरे प्रदेश में आदेश जारी कर दिया कि जो खेल संघ खेल कानून के तहत रजिस्टर्ड नहीं है, वे राजस्थान शब्द का उपयोग नहीं कर सकते. इस आदेश की जद में करीब एक दर्जन से अधिक खेल संघ आते हैं, जिनको रजिस्ट्रार सहकारिता ने रजिस्टर्ड ही नहीं किया. इनमें वुशू भी शामिल है, जिसके खिलाड़ियों ने हाल ही नेशनल गेम्स में राजस्थान के लिए सबसे ज्यादा 12 पदक जीते थे. जो खेल रजिस्टर्ड नहीं है, उनके खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी भी मिली है और सरकार से ईनामी राशि भी. 

 

हाल ही एक राज्य संघ के लिए तो सरकार ने बजट में एकेडमी की भी घोषणा कर दी. इसी तरह पिकलबॉल खेल के लिए स्टेडियम में टेनिस को कोर्ट खेल परिषद ने दे दिया, जबकि यह खेल संघ भी रजिस्टर्ड नहीं है. ऐसे में सवाल यह उठता है जब दो दशक से एक भी नए खेल को रजिस्टर्ड नहीं किया गया, तो आखिर इन खेल संघों व इसके खिलाड़ियों का क्या दोष है ? खेल परिषद ने बजाय कोई रास्ता निकाले एक आदेश जारी करके खिलाड़ियों पर संकट के बादल गहरा दिए हैं.