जयपुरः राजस्थान में वर्ष 2024 में पर्यटकों की आवक में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. 2023 के मुकाबले 2024 में पर्यटकों के रुझान में जबरदस्त बदलाव हुआ है. सीकर ने लगातार दूसरे वर्ष पहले स्थान पर अपनी धाक कायम रखी है, जबकि जयपुर जो पहले नंबर पर था, वह अब छठे स्थान पर फिसल गया है. राजस्थान में धार्मिक, वाइल्डलाइफ और डेजर्ट टूरिज्म के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि देखी गई है. कोरोना के बाद इन क्षेत्रों में जबरदस्त बूम आया है, जिससे राज्य के पर्यटन उद्योग को नया उछाल मिला है.
धरोहर के आसपास अब सुकून नहीं रहा. वाहनों का लंबा जाम, पार्किंग न होना, धरोहर के आसपास लपकों का मंडराना और समुचित साफ सफाई न होना अब पर्यटकों को परेशान करने लगी है. यही कारण है कि जयपुर जिले में एक ही वर्ष में 74 लाख से ज्यादा पर्यटक ऑन की कमी देखने को मिली. सीकर पहले स्थान पर कायम है तो जयपुर दूसरे स्थान से फिसल कर छठे स्थान पर पहुंच गया है. चित्तौड़गढ़ ने जयपुर को पछाड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया. अजमेर ने भी तीसरे स्थान पर अपनी स्थिति बरकरार रखी. जैसलमेर ने अपनी लंबी छलांग लगाते हुए आठवें से चौथे स्थान पर जगह बनाई. सवाई माधोपुर का पांचवा स्थान भी लगातार दूसरे वर्ष कायम रहा. सिरोही ने सातवें स्थान पर अपनी पकड़ मजबूत की, जबकि भरतपुर, उदयपुर और करौली क्रमशः आठवें, नौवें और दसवें स्थान पर हैं. बीकानेर और राजसमंद ने 11वें और 12वें स्थान पर अपनी स्थिति बनाए रखी है.
धार्मिक, वाइल्डलाइफ का डेजर्ट टूरिज्म का जोर:
राजस्थान में धार्मिक, वाइल्डलाइफ और डेजर्ट टूरिज्म के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि देखी गई है. कोरोना के बाद इन क्षेत्रों में जबरदस्त बूम आया है, जिससे राज्य के पर्यटन उद्योग को नया उछाल मिला है. वर्ष 2024 में राजस्थान के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल लगातार पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे. सीकर जिले में खाटू श्याम जी के आशीर्वाद से 2.76 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे, जो प्रदेश के सबसे अधिक पर्यटकों वाले जिले के रूप में उभरा. चित्तौड़गढ़ में सांवलिया सेठ और शौर्य की धरती पर 2.42 करोड़ सैलानी पहुंचे. तीर्थराज पुष्कर और अजमेर की दरगाह शरीफ में क्रमशः 2.26 करोड़ और 2.42 करोड़ पर्यटक आए. जैसलमेर, जो डेजर्ट और बॉर्डर टूरिज्म के लिए प्रसिद्ध है, में 2.25 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ. सवाई माधोपुर, जो बाघों की नगरी है, में 1.43 करोड़ पर्यटक पहुंचे. जयपुर जिले में विकास कार्यों के कारण जाम की समस्या होने के बावजूद 1.33 करोड़ पर्यटक आए. सिरोही, जो प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है, में 1.26 करोड़ पर्यटक पहुंचे. भरतपुर, झीलों की नगरी उदयपुर, और करौली में भी पर्यटकों का अच्छा खासा आना जारी रहा. बीकानेर और राजसमंद में क्रमशः 64.25 लाख और 51.64 लाख पर्यटक पहुंचे, जो इनके आकर्षक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल दर्शाते हैं. इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि राजस्थान में पर्यटन उद्योग में निरंतर वृद्धि हो रही है.
जाम से जूझते जयपुर में 1 वर्ष में 74 लाख से ज्यादा पर्यटकों की कमी:
जयपुर में पर्यटकों की आवक में वर्ष 2024 में एक बड़ी गिरावट आई है. 2023 में जहां जयपुर जिले में 2 करोड़ 9 लाख 95,071 पर्यटक आए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 1 करोड़ 33 लाख 7,204 तक सीमित रह गई. इसमें 76 लाख 87 हजार 867 की गिरावट दर्ज की गई है. 2023 में जहां 2 करोड़ 1 लाख 22,184 घरेलू पर्यटक और 8 लाख 72,887 विदेशी पर्यटक थे, वहीं 2024 में ये आंकड़े क्रमशः 1 करोड़ 24 लाख 83,670 और 6 लाख 23 हजार 534 तक गिर गए. इस गिरावट के प्रमुख कारणों में शहर में बढ़ते जाम और ट्रैफिक की समस्या है. गूगल मैप पर दिखती लाल लकीर और प्रदूषण ऐप पर बढ़े प्रदूषण ने पर्यटकों के अनुभव को प्रभावित किया है. पिछले वर्षों में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए उचित योजना और सुविधाओं का अभाव रहा, जिससे पार्किंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट और स्वास्थ्य-स्वच्छता जैसी चुनौतियां सामने आईं. इन समस्याओं के कारण पर्यटकों ने जयपुर की ओर आने से बचना शुरू किया है, जिससे इस क्षेत्र में पर्यटकों की आवक में गिरावट आई.
धरोहर पर मंडराता खतरा संरक्षण की दरकार:
राजस्थान की धरोहर पर संकट मंडरा रहा है, जहां एक ओर धार्मिक और प्रकृतिक पर्यटन का बोलबाला है, वहीं धरोहर पर्यटन में बड़ी गिरावट आई है. वर्ष 2024 में धार्मिक स्थलों ने पर्यटकों को अपनी ओर खींचा, जहां 100 में से 90 पर्यटकों ने आस्था के केंद्रों का भ्रमण किया. दूसरी ओर, मरुस्थल के रोमांच ने जैसलमेर को 100 में से 10 पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया, जबकि वन्यजीव और जंगल सफारी ने भी 10 प्रतिशत पर्यटकों को अपनी ओर खींचा. लेकिन धरोहर स्थल, जो कभी राजस्थान की पहचान थे, अब पिछड़ते नजर आ रहे हैं. वर्ष 2024 में, 100 में से सिर्फ 5 पर्यटकों ने ही किलों, महलों और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया. जाम, प्रदूषण, और ट्रैफिक की समस्याओं ने इन स्थलों के आकर्षण को कम कर दिया है. राजस्थान की धरोहर को संरक्षण की आवश्यकता है, ताकि वह अपनी ऐतिहासिक महत्ता और आकर्षण को फिर से वापस पा सके. यह समय है जब राज्य को अपनी धरोहरों की सुरक्षा और प्रचार-प्रसार पर ध्यान देना होगा, ताकि वह भविष्य में भी पर्यटकों के लिए आकर्षक बने रहें.