जयपुर: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे दुर्घटनाओं का एक्सप्रेस वे बन गया है. सोहना से सवाईमाधोपुर पर तक टूटी सुरक्षा दीवार, कई जगह उखड़ी स्ट्रेच, एनएचएआई की शह पर अवैध ढाबे और मवेशियों का अवागमन देश के सबसे लंबे एक्सप्रेस वे को दुर्घटनाओं के एक्सप्रेस वे में तब्दील कर रहे हैं. यही कारण है कि लोग इस पर आने से डरने लगे हैं और यहां ट्रेफिक अभी 25 फीसदी भी नहीं है.
वादे जो हवा हुए, भरोसा टूटा
दावा हकीकत
दौसा से दिल्ली करीब 3 घंटे कम होगी एक घंटे का ही फर्क
पूरी स्ट्रेच पर 4 फीट ऊंची सुरक्षा दीवार हर 20 मीटर बाद सुरक्षा दीवार गायब
एक लाख वाहन दूसरे NH से होंगे शिफ्ट पूरी क्षमता का 25 फीसदी भी नहीं वाहन भार
हर साल 32 करोड़ लीटर ईंधन बचेगा कार्य पूर्ण नहीं, राहत नहीं
दिल्ली-मुंबई की दूरी 150 किमी घटेगी कार्य पूर्ण नहीं, राहत नहीं
गाड़ियों की रफ्तार 120 किमी प्रति घंटे सुरक्षा दीवार टूटी, दुर्घटना बढ़ी
एनएच-8 पर वाहनों का दबाव कम होगा कार्य पूर्ण नहीं, राहत नहीं
1 लाख वाहनएक्सप्रेस-वे पर शिफ्ट होंगे कार्य पूर्ण नहीं, राहत नहीं
हर 50 किलोमीटर पर एक रेस्ट एरिया एक चालू, बाकि पर काय अधूरा
सोहना से सवाई माधोपुर तक यात्री सुविधा महज एक रेस्ट एरिया ही हो पाया शुरू
8 लेन के दिल्ली-मुंबई एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे को 373 किलोमीटर हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरता है. करीब 16 हजार 600 करोड़ रुपए राजस्थान में इस पर खर्च किए गए हैं. अलवर, भरतपुर, दौसा, सवाईमाधोपुर, टोंक, बूंदी और कोटा होकर यह मध्यप्रदेश की सीमा में प्रवेश करता है. प्रोजेक्ट को जनवरी 2023 में पूरा होना था लेकिन अभी तक नहीं हो सका. अधूरे हिस्से में ही दो वर्ष पहले यातायात शुरू कर दिया गया. अब यहां लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं. राजस्थान के पूरे हिस्से में ही जगह जगह सुरक्षा दीवार टूटी हुई है. मवेशी सड़क पर आते हैं और लोग दुर्घटना में जान गवां रहे हैं. दीवार तोड़कर लोगों ने अवैध ढाबे बना लिए हैं जहां ट्रक व दूसरे भारी वाहन अवैध ढंग से पार्क किए जा रहे हैं. खुद एनएचएआई के कर्मचरी इन ढाबों पर सेवाएं लेते दिख जाते हैं. सुरक्षा दीवार के स्लैब लोगों ने अपने घरों में लगा लिए हैं.
दरअसल देश के सबसे लंबे और सुविधा संपन्न एक्सप्रेस वे को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने पूरे भरोसे से कई वायदे किए थे.. लेकिन एनएचएआई के अधिकारी न तो मंत्री की मंशा के अनुरूप कार्य कर पाए न ही आमजन की सुरक्षा से उन्हें कोई लेना देना है. यही कारण है कि 1344 किमी के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर समय अवधि समाप्त होने के डेढ़ वर्ष बाद भी काम पूरा नहीं हो सका है. ऐसे में देश का सबसे सुरक्षित होने के बजाय यह देश का सबसे डरावना और खतरनाक एक्सप्रेस वे बनता जा रहा है.