VIDEO: जयपुर बना राजस्थान का सबसे बड़ा वाइल्ड लाइफ टूरिज्म हब, 2024 में पर्यटकों के आगमन में पिछला रिकॉर्ड तोड़ा, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: जयपुर, जो अपनी ऐतिहासिक धरोहर और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है, अब वाइल्डलाइफ टूरिज्म के क्षेत्र में भी अपना दबदबा बना चुका है. वर्ष 2024 में इस नगर ने पर्यटकों के आगमन के मामले में अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ा, जिससे यह सिद्ध होता है कि जयपुर अब प्रदेश का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ टूरिज्म हब बन चुका है. वर्ष 2024 में कुल 7 लाख 25 हजार 915 पर्यटक जयपुर पहुंचे, जिन्होंने यहां के वन्यजीव क्षेत्रों और सफारी का आनंद लिया.

जयपुर में वाइल्डलाइफ टूरिज्म के प्रमुख आकर्षणों में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क है, जिसे इस वर्ष 3 लाख 17 हजार 397 पर्यटकों ने विजिट किया. इसके बाद शहर के प्रसिद्ध चिड़ियाघर को 2 लाख 51 हजार 959 पर्यटकों ने देखा. हाथी गांव ने भी 83 हजार 873 पर्यटकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया. साथ ही, झालाना लेपर्ड सफारी, जो देशभर में अपनी लोकप्रियता के लिए मशहूर है, यहां 41 हजार 77 पर्यटकों ने सफारी का अनुभव लिया. आमागढ़ लेपर्ड सफारी ने भी 12 हजार 204 पर्यटकों को आकर्षित किया.

सफारी/पार्क          पर्यटक
चिड़ियाघर             251959
NBP                    317397
झालाना                41077
आमागढ़               12204
लायन सफारी        18115
टाइगर सफारी        1290 (नवंबर, दिसंबर)
हाथी गांव               83873
कुल पर्यटक           725915

नाहरगढ़ लायन सफारी और टाइगर सफारी भी पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बने रहे, जिनमें 18 हजार 115 और 1,290 पर्यटकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. जयपुर ऐसा एकमात्र शहर है जहां दो लेपर्ड सफारी के साथ-साथ एक-एक लायन, टाइगर और हाथी सफारी का अनुभव लिया जा सकता है, जो इसे विशेष बनाता है.

बायोलॉजिकल पार्क, रेस्क्यू सेंटर और चिड़ियाघर: गुलाबी नगर की शान
जयपुर में वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क और चिड़ियाघर एक नई पहचान बना चुके हैं. इन स्थानों पर पर्यटक सिर्फ वन्यजीवों का दृश्यावलोकन नहीं करते, बल्कि वे वन और वन्य जीव प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त करते हैं. इसके साथ ही, वन विभाग लगातार प्रयासरत है कि वन्यजीवों और पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में और अधिक कदम उठाए जाएं. वन विभाग के अधिकारी, जैसे कि डीसीएफ विजय पाल सिंह, एसीएफ प्राची चौधरी, देवेंद्र सिंह राठौड़, रेंजर जितेंद्र सिंह शेखावत और शुभम शर्मा पर्यटकों को वन्यजीवों से जुड़ी जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. इसके साथ ही, वे पर्यटन प्रबंधन और प्रे-बेस मैनेजमेंट में भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं.

वाइल्डलाइफ प्रबंधन में चुनौतियां और आगामी योजनाएं
हालांकि पर्यटकों की बढ़ती संख्या एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसके साथ ही पर्यटन प्रबंधन भी एक बड़ी चुनौती बन गई है. पर्यटकों की संख्या में वृद्धि से जहां इन स्थानों की आकर्षण में इजाफा हुआ है, वहीं इन क्षेत्रों में भीड़-भाड़ और प्रबंधन की जटिलताएं बढ़ी हैं. इस चुनौती को देखते हुए वन विभाग और पर्यटन विभाग ने कई कदम उठाए हैं. जयपुर में जल्द ही नाहरगढ़ में तीसरी लेपर्ड सफारी शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके. इसके अलावा, मुहाना वेटलैंड में बर्ड वाचिंग भी शुरू की जा सकती है, जो बर्ड लवर्स के लिए एक बड़ा आकर्षण होगा. पुराने चिड़ियाघर में विशाल बर्ड एवियरी बनाने की योजना भी वन विभाग के पास है, जो पर्यटकों को और अधिक आकर्षित करेगा.

महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां और वन्यजीव संरक्षण
वन विभाग के अधिकारी और सहायक वनपाल कृष्ण कुमार मीणा और राजेंद्र सिंह, पर्यटकों के सुरक्षा और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. उनका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. साथ ही, वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों को वाइल्डलाइफ एनकाउंटर के दौरान आवश्यक एहतियात बरतने की जानकारी भी दी जा रही है.

 

बॉलीवुड और खेल हस्तियों का आगमन
जयपुर के वाइल्डलाइफ रिजर्व, जैसे कि झालाना लेपर्ड रिजर्व, बॉलीवुड सेलिब्रिटीज और खेल जगत की हस्तियों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण स्थल बन चुका है. इन हस्तियों का आगमन इन स्थानों की लोकप्रियता में और भी इजाफा करता है, और इसके माध्यम से पर्यटकों को और अधिक आकर्षित किया जा सकता है.कुल मिलाकर, जयपुर का वाइल्डलाइफ टूरिज्म तेजी से विकसित हो रहा है और यह गुलाबी नगर के पर्यटन उद्योग के लिए एक नया आयाम स्थापित कर रहा है. वन विभाग की योजनाएं और कदम पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए निरंतर जारी हैं, जिससे जयपुर वाइल्डलाइफ टूरिज्म के क्षेत्र में और भी प्रगति कर सकेगा.