VIDEO: 6 महीने में छह बार इंसानी बस्ती में पहुंचे लेपर्ड, कमजोर प्रे बेस ने बढ़ाई चिंता ! देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजधानी जयपुर में एक बार फिर लेपर्ड के बस्ती में घुसने की घटना सामने आई है. शुक्रवार सुबह, राजधानी के जगतपुरा क्षेत्र के हरी नगर में एक मादा लेपर्ड ने एक मकान में प्रवेश कर लिया, जिसके बाद वन विभाग को सूचित किया गया. मादा लेपर्ड, जिसे बाद में तितली नाम से पहचाना गया, डेढ़ वर्ष की थी. इस घटना को लेकर वन विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हो गई और 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद, उसे रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया गया.

वन विभाग को लेपर्ड के मूवमेंट की सूचना मिलने के बाद, डीएफओ विजयपाल सिंह ने रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजा. रेस्क्यू ऑपरेशन में वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ अरविंद माथुर और डॉ अशोक तंवर की उपस्थिति रही, साथ ही रेंजर जितेंद्र सिंह शेखावत, रेंजर रेस्क्यू जितेंद्र चौधरी और झालाना नाका प्रभारी वनपाल कृष्ण कुमार मीणा भी मौके पर मौजूद थे. मादा लेपर्ड एक कार के नीचे छिप कर बैठ गई थी, जिसके बाद उसे ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया. 

चिकित्सकीय मुआयने के बाद उसे फिर से जंगल में छोड़ दिया गया.वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह समस्या गर्मियों में और बढ़ सकती है. कमजोर प्रे बेस की वजह से झालाना और आसपास के इलाकों में लेपर्ड्स अक्सर बस्तियों में प्रवेश करते हैं. पिछले छह महीनों में यह छठी बार था जब एक लेपर्ड बस्ती में घुसा था. फिलहाल, वन विभाग का फोकस झालाना और आमागढ़ क्षेत्रों में प्रे बेस और वाटर मैनेजमेंट पर है, ताकि जंगलों में अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकें और वन्यजीवों का रिहायशी बस्तियों में आना कम हो सके. 

झालाना क्षेत्र में 45 से अधिक लेपर्ड्स की संख्या बताई जाती है, जो वहां के जंगलों में निवास करते हैं. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती बस्तियों और जंगलों के बीच की दूरी के कारण वन्यजीवों को इन बस्तियों में आने का खतरा और भी बढ़ सकता है, खासकर गर्मी के मौसम में, जब जंगलों में पानी की कमी और भोजन की तलाश में वे बस्तियों की ओर रुख करते हैं. ऐसे में, वन विभाग द्वारा जल प्रबंधन और शिकार के संसाधनों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और बस्तियों में उनके घुसने की समस्या को कम किया जा सके.