जयपुर : रक्तदान को बढ़ावा देने और जरूरतमंदों को समय पर "रक्त" उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेशभर में धडल्ले से निजी ब्लड बैंक तो खोले जा रहे है, लेकिन सरकारी सिस्टम की अनदेखी के अभाव में इनमें से कई सेंटर "ब्लड तस्करी" के केन्द्र बनते नजर आ रहे है. जी हां ये कोई हमारा आरोप नहीं, बल्कि पिछले दिनों में सामने आए कुछ गंभीर प्रकरणों की बानगी है. हालांकि, प्रकरण सामने आने के बाद औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने ब्लड बैंकों पर सख्त एक्शन तो लिया है, लेकिन ऐसी घटनाओं ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान जरूर खड़ा कर दिया है. आखिर क्या है राजस्थान में ब्लड बैंकों की तस्वीर और कैसे अवैध कारोबार में लिप्त हो रहे ब्लड बैंक.
"रक्तदान, महादान", इस मुहिम से जुड़ते हुए प्रदेशभर में रोजाना सैंकड़ों की संख्या लोग स्वैच्छिक रक्तदान करते है. मंशा सिर्फ ये है कि कोई भी जरूरतमंद हो, उसे रक्त की उपलब्घता के अभाव में जान नहीं गंवाई पड़े. लेकिन औषधि नियत्रंण आयुक्तालय और राजस्थान स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल के अफसरों की अनदेखी के चलते इस सामाजिक पेशे में कार्यरत कुछ निजी ब्लड बैंक "खून की तस्करी" जैसे आपराधिक कृत्य में लिप्त होने लगे है. पिछले यदि एक माह का आंकड़ा देखे तो पांच बडे़ मामले सामने आए, जहां रक्त की तस्करी समेत अन्य अनियमिताओं के चलते निजी ब्लड बैंकों के लाइसेंस निरस्त करने पड़े. आइए आपको बताते है पिछले दिनों के चर्चित प्रकरण.
केस एक - पुलिस ने पिछले दिनों जोबनेर में 255 यूनिट ब्लड पकड़ा, तो दो ब्लड बैकों की कारस्तानी सामने आ गई. ब्लड तस्करी से जुड़े गंभीर मामले की जांच में पता चला कि सवाई माधोपुर के महादेवी ब्लड सेंटर पर कार्यरत डॉ तपेन्द्र कुमार सरकारी अस्पताल में यूटीबी पर सेवाएं दे रहा है. साथ ही सेंटर पर रिकॉर्ड भी संधारित नहीं मिला, जिसके चलते ब्लड सेंटर का लाइसेंस आनन फानन में किया गया निरस्त
केस दो - जोबनेर में 255 यूनिट ब्लड की खेप को जब पकड़ा गया तो कई खुलासे हुए . जांच में पता चला कि मकराणा ब्लड बैक ने बड़ा ब्लड कैम्प लगाया और फिर उसे दूसरी जगह के लिए बिना मापदण्ड फोलो किए भेज दिया. पूरे मामले की पड़ताल में ब्लड के संधारण में भी कई तरह की गंभीर अनियमिताएं उजागर हुई. ऐसे में औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने आनन फानन में ब्लड बैंक का लाइसेंस निरस्त किया.
केस तीन - श्रीगंगानगर के नग्गी गांव में पिछले दिनों ब्लड कैप आयोजित किया गया. जयपुर के पिंकसिटी ब्लड को औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने सिंगल बैग में खून लेने की शर्त पर अनुमति दी, लेकिन कैम्प में डबल बैग में रक्त लेना शुरू कर दिया. लोगों ने विरोध किया तो आनन फानन में रक्तदान शिविर को बन्द करते हुए 20 यूनिट ब्लड सरकारी अस्पताल में जमा किया गया.
केस चार - जयपुर में विद्याधर नगर स्थिर फ्रीडम ब्लड बैंक की जांच की गई तो वो किसी दूसरे व्यक्ति को सब्लेट किया हुआ मिला. ड्रग एण्ड कॉस्मेटिक एक्ट में लाइसेंस को "सब्लेट" करने का प्रावधान नहीं है. ऐसे में लाइसेंस को निरस्त किया गया.
केस पांच - 2022 में निजी ब्लड बैंक से रक्त की दूसरे राज्यों में तस्करी का सनसनीखेज प्रकरण सामने आया. करीब ढाई साल की जांच में खुलासा हुआ कि यूपी और छत्तीसगढ़ के जिन ब्लड बैंकों को राजस्थान से ब्लड भेजने का रिकॉर्ड पेश किया गया, वहां इस दौरान किसी भी तरह के रक्त की आपूर्ति नहीं हुई. ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए चूरू के शेखावटी ब्लड बैंक का लाइसेंस निरस्त किया गया .
रक्त के अवैध कारोबार का मामला नया नहीं है. 2022 में इसी तरह का एक प्रकरण सामने आया था, जिसमें पाया गया कि राजस्थान से यूपी में ब्लड की तस्करी हो रही है. हाल ही में इस प्रकरण में शेखावटी ब्लड बैंक का लाइसेंस निरस्त किया गया है. लेकिन तब ड्रग आयुक्तालय की जांच में सामने आया था कि पिछले 2 सालों में आठ ब्लड बैंकों से 11 हजार यूनिट से अधिक ब्लड उत्तर प्रदेश भेजा गया था. तब आयुक्तालय ने NACO की गाइडलाइन का हवाला देते हुए बयान जारी किया था कि एक राज्य से दूसरे राज्य के ब्लड सेंटर में ब्लड भेजा जा सकता है. लेकिन तब भी ये सवाल खड़े हुए थे कि इसके लिए नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल को सूचना देना जरूरी है. जिसकी किसी भी जगह पालना नहीं हो रही है. इस तरह का प्रकरण आने के बावजूद अभी तक "रक्त के अवैध खेल" पर कोई अंकुश नहीं लगाया गया है.
आठ ब्लड बैंकों पर उठे सवाल, एक पर गिरी कार्रवाई की गाज !
- राजस्थान से यूपी भेजे गए 11000यूनिट ब्लड का ढाई साल बाद फिर चर्चाओं में प्रकरण
- 2022 में यूपी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए खून के दलालों पर कंसा था शिकंजा
- इस दौरान ड्रग आयुक्तालय की जांच में उन आठ ब्लड सेंटरों का नाम आया सामने
- जिन्होंने दो साल में करीब 11 हजार यूनिट ब्लड यूपी समेत अन्य राज्यों में भेजा
- ड्रग आयुक्तालय ने दूसरे राज्यों को क्रास चेक करने के लिए भेजा इन सेन्टरों का डेटा
- तो हाल में ही शेखावटी ब्लड बैंक को लेकर सामने आई बड़ी चौंकाने वाली जानकारी
- यूपी से मिली रिपोर्ट में जिक्र, जिन चार ब्लड बैंक को पीआरबीसी सप्लाई की दी गई जानकारी
- वहां नहीं मिला ऐसा कोई रिकॉर्ड, जिसके चलते उन्होंने माना कि PRBC की हुई है तस्करी
- इसके अलावा छत्तीसगढ़ से मिली रिपोर्ट में भी लाइसेंसी की तरफ से गलत जानकारी का जिक्र
- छत्तीसगढ़ की रिपोर्ट में भी साफ लिखा गया कि PRBC की तस्करी हुई है, जो काफी गंभीर है
- इस रिपोर्ट के आधार पर आनन-फानन में शेखावटी ब्लड बैंक का लाइसेंस किया गया निरस्त
- लेकिन शेष ब्लड बैंकों के रिकॉर्ड के सत्यापन की अब तक दूसरे राज्यों से नहीं मिली जानकारी
- ऐसे में सवाल ये कि क्या अफसरों की मिलीभगत से नहीं भेजी भेजा जा रहा रिकॉर्ड का सत्यापन
- यदि इन सेन्टरों से दूसरे राज्यों में गया है ब्लड तो फिर सत्यापन रिपोर्ट भेजने में देरी का क्या है कारण ?
- इस बारे में ड्रग कंट्रोल अजय फाटक का बयान, 2022 के प्रकरण को लेकर एक सेन्टर की आई है रिपोर्ट
- रिपोर्ट मिलने के साथ ही सेन्टर का लाइसेंस किया निरस्त, शेष सेन्टरों की रिपोर्ट आना अभी बाकी
सवाल मांगे जवाब
- नियमानुसार शुद्धता के नाम पर जब अंतर जिला रक्त ट्रांसफर के लिए देनी होती है एडीसी-डीसी को सूचना तो फिर दूसरे राज्यों तक जा रहे ब्लड की सूचना और एनओसी से कैसे बेखबर ड्रग आयुक्तालय ?
- नियमानुसार 20 दिन के बाद ही ब्लड बैंक दूसरी जगह के लिए भेज सकते है ब्लड, वो भी सम्बन्धित ब्लड बैंक के उपयोग का अधिकतम 30 फीसदी ही, जबकि कई ब्लड बैंक ऐसे है जो महज पांच से सात दिन के बाद ही यूपी भेज रहे ब्लड
- जिन ब्लड बैंकों की जांच की गई है, उनमें से कईयों के खिलाफ पिछले दिनों की जांच में कई गंभीर अनियमिताएं मिली थी....बकायदा विभाग की तरफ से नोटिस जारी किए गए, लेकिन अभी तक कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति क्यों ?
- तीन साल पहले रक्त की तस्करी का सामने आ चुका प्रकरण, फिर भी अभी तक जिम्मेदार एजेंसियां क्यों नहीं तैयार कर पाई ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम ?