जयपुरः उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने आज राज्य बजट 2025-26 में पर्यटन, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं. इस बजट में राज्य के पर्यटन उद्योग को और अधिक प्रोत्साहित करने के लिए कई नई योजनाओं का प्रस्ताव किया गया है, जिनसे राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर और पर्यटन स्थलों को नई पहचान मिलेगी.
पर्यटन स्थलों का विकास करने की योजना:
इस बजट में पहली बार IIFA अवार्ड्स का आयोजन गुलाबी नगरी जयपुर में किए जाने की घोषणा की गई है, जो राज्य के पर्यटन को वैश्विक मंच पर एक नई ऊँचाई तक पहुंचाएगा. इसके अलावा, पर्यटन विकास के लिए 975 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है. मंत्री ने हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 10 प्रमुख पर्यटन स्थलों का विकास करने की योजना घोषित की है, जिससे पर्यटकों को राजस्थान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू कराया जाएगा.
नाइट टूरिज्म को बढ़ावा:
राज्य में नाइट टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिससे रात के समय पर्यटन गतिविधियाँ और बढ़ सकेंगी. मंत्री ने शेखावाटी हवेली संरक्षण योजना और हेरिटेज वॉक जैसी योजनाओं का भी प्रस्ताव किया, जो ऐतिहासिक हवेलियों और कलात्मक स्थलों के संरक्षण और प्रसार के लिए महत्वपूर्ण हैं.
अल्बर्ट हॉल म्यूजियम के उन्नयन के लिए 25 करोड़ रुपये का बजट:
इसके साथ ही, लोक गायकों और संगीतकारों के लिए बीकानेर में गवरी देवी कला केन्द्र की स्थापना की जाएगी. जयपुर के अल्बर्ट हॉल म्यूजियम के उन्नयन के लिए 25 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिससे म्यूजियम के संग्रह और सुविधाओं में सुधार होगा. संस्कृति पोर्टल की स्थापना की जाएगी, जो गांवों और मंदिरों के इतिहास को रिकॉर्ड करेगा और उसे डिजिटल रूप में संरक्षित करेगा.
धार्मिक स्थलों के आसपास सुविधाओं का विस्तार:
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 95 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें पुष्कर-अजमेर, रणथम्भौर त्रिनेत्र गणेश जी सवाई माधोपुर, जीण माता-सीकर, तनोट माता मंदिर व रामदेवरा-जैसलमेर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. इसके अतिरिक्त, त्रिवेणी संगम-बेणेश्वर धाम, रामेश्वर घाट, और बीगोद संगम को भी विकसित किया जाएगा.
इन क्षेत्रों में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा:
राज्य के विभिन्न झीलों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा, और 600 मंदिरों में दीपावली, होली और राम नवमी जैसे प्रमुख त्योहारों पर विशेष साज-सज्जा और आरती कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. आदिवासी बाहुल्य जिलों में 'ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट' विकसित करने के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे इन क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.
एसी ट्रेनों से तीर्थ यात्रा की सुविधा:
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 10 गांवों को विकसित किया जाएगा. वहीं, जैसलमेर में War Museum के लिए आधारभूत संरचना और सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा. वरिष्ठ नागरिकों के लिए तीर्थ यात्रा योजना के तहत 6,000 वरिष्ठजन को हवाई मार्ग से तीर्थ यात्रा कराई जाएगी और 50,000 वरिष्ठ नागरिकों को एसी ट्रेनों से तीर्थ यात्रा की सुविधा प्रदान की जाएगी.
फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन की स्थापना:
राज्य में 29 हवाई पट्टियों को बड़े हवाई जहाजों के लिए योग्य बनाने की योजना है. साथ ही, प्रतापगढ़, झालावाड़ और झुंझुनूं में फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) की स्थापना की जाएगी. जयपुर, जोधपुर और उदयपुर में Hop-on Hop-off बस सेवा की शुरुआत की जाएगी, जिससे पर्यटकों को इन शहरों में घूमने में सहूलियत होगी.
पर्यटन को नया आयाम देने वाली योजनाएँ:
जयपुर में वर्ष 2027 में गोविन्द देव जी कला महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जो राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने का एक अहम अवसर होगा. कोटा एयरपोर्ट के निकट Aero City की स्थापना और माउंट आबू-सिरोही में Aero Sports Activities की शुरुआत भी राज्य में पर्यटन को नया आयाम देने वाली योजनाएँ हैं.