जयपुर: राजस्थान रोडवेज के संचालक मंडल की 310 वीं बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं. बैठक में निगम की रिक्त भूमि पर पेट्रोल पंप लगाने, प्रदेश के 8 जिलों में बस स्टैंड के आधुनिकीकरण, बसों की संख्या में बढ़ोतरी जैसे प्रमुख फैसले हुए.
राजस्थान रोडवेज की बोर्ड बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं. चीफ मैनेजरों की दादागिरी खत्म करने और पूरे प्रदेश में रोडवेज से जुड़े फैसलों में एकरूपता लाने के लिए अब चीफ मैनेजरों से असीमित अधिकार वापस लिए जाएँगे, चीफ मैनेजरो की HOD की शक्ति खत्म किया जाएगा , चीफ मैनेजर अब विभागाध्यक्ष की जगह सिर्फ़ कार्यालयाध्यक्ष होंगे, अब अभियोजन स्वीकृति, कार्मिक को बहाल करने जैसे फ़ैसले चीफ मैनेजर नहीं ले पाएंगे, अभी तक अलग अलग डिपो के चीफ मैनेजर अलग अलग तरह के फ़ैसले लेते थे जिनसे रोडवेज की छवि को नुक़सान होता था.
रोडवेज MD पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि निगम ने हाल ही में संपन्न तिमाही में संचालन परिणामों में अच्छा प्रदर्शन किया है. दिसंबर, 2024 में समाप्त त्रैमास में निगम ने कुल 494.09 करोड़ रुपये की संचालन आय अर्जित की जिसमें 26 करोड़ रुपये का संचालन लाभ और 101% यात्रीभार प्राप्त किया गया. साथ ही, डीजल औसत में भी महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया. फरवरी माह में निगम का यात्री भार रिकॉर्ड 115% तक पहुंच गया संचालक मंडल ने इस उपलब्धि के लिए निगम प्रबंधन की तारीफ़ की.
रोडवेज की खाली पड़ी भूमि पर सरकारी तेल कंपनियों के सहयोग से पेट्रोल पंप एवं बस स्टॉप स्थापित किए जाएंगे. इस नए मॉडल को निगम संचालक मंडल द्वारा सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है जिससे यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं प्राप्त होने के साथ-साथ निगम को गैर-संचालन आय भी प्राप्त होगी, प्रदेश के 8 जिलों अजमेर, भरतपुर, उदयपुर, बूंदी, बीकानेर, ब्यावर, चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा जिलों में निगम के आधुनिकतम सुविधायुक्त बस स्टैंड बनाए जाएंगे. ये बस स्टैंड बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर मॉडल पर विकसित किए जाएंगे जिसके लिए निगम ने सलाहकार सेवाओं हेतु निविदाएं जारी कर कार्य प्रारंभ कर दिया है. इन बस स्टैंडों के विकास से यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा मिलेगी और साथ ही रोडवेज की गैर-संचालन आय में वृद्धि होगी.
इसके अतिरिक्त, प्रदेश में 12 नए स्थानों पर बस स्टैंडों का निर्माण और 21 अन्य बस स्टैंडों का विकास राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा, रोडवेज बेड़े के सुदृढ़ीकरण के तहत निगम अपनी बसों की संख्या को वर्ष 2026 तक 5000 तक ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. वर्तमान में यह संख्या घटकर लगभग 3500 बसों तक रह गई थी. यात्रियों की सुविधा और सुगम यात्रा को ध्यान में रखते हुए इस संख्या को योजनाबद्ध तरीके से बढ़ाने का निर्णय लिया गया है.