जयपुरः प्रदेश के कैंसर मरीजों का एक छत के नीचे इलाज का ख्वाब अब पूरा होते दिख रहा है. अब इसे SMS मेडिकल कॉलेज प्रशासन की इच्छा शक्ति कहे या फिर स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट प्रशासन का सेवाओं के विस्तार प्रयास, जिसके चलते डेढ़ साल के भीतर ओपीडी से लेकर आईपीडी का आंकड़ा दोगुना को पार कर गया है. फर्स्ट इंडिया की सामाजिक सरोकार की मुहिम का ही असर है कि ये इंस्टीट्यूट जल्द ही देश के ख्यातिमान कैंसर ट्रीटमेंट सेन्टर में शामिल होगा. आखिर स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के प्रति कैसे बढ़ा मरीजों का विश्वास और आगामी दिनों में कैसे ये इंस्टीट्यूट बनेगा राजस्थान की शान.
कैंसर, इस भयावह बीमारी की दस्तक पूरे परिवार पर कहर बनकर टूटती है. हो भी क्यों नहीं, भारत में हृदय रोग के बाद मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण कैंसर बनकर उभर रहा है. अकेले राजस्थान की बात की जाए तो हर साल 75 हजार से अधिक कैंसर के नए मरीज चिन्हित हो रहे है. जिसमें से 60 फीसदी से अधिक मरीज तो ऐसे है, जो 3 स्टेज को पार कर चुके होते है. ऐसे में कैंसर के प्रीवेंशन और बेहतर ट्रीटमेंट के लिए 2016 में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की सोच पर काम शुरू हुआ. करीब चार साल गुजरने के बाद प्रतापनगर में इंस्टीट्यूट को शुरू तो कर दिया, लेकिन किसी न किसी आड़ में तीन सालों तक ये सेंटर अपनी पहचान भी नहीं बना पाया. हालात ये थे कि कैंसर के मरीज एसएमएस और स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के बीच फुटबाल बनकर रह गए. ऐसे में फर्स्ट इंडिया ने कैंसर मरीजों की पीड़ा को उठाने का जिम्मा लिया और लगातार खबरें प्रकाशित की, जिसके चलते नवम्बर 2023 में एसएमएस से 80 फीसदी कैंसर से जुड़े कामकाज और फैकल्टी को स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में शिफ्ट किया गया. प्रशासन की सख्ती और अत्याधुनिक सेवाओं का ही असर रहा कि पिछले डेढ़ साल में इंस्टीट्यूट में कैंसर मरीजों की संख्या का ग्राफ दोगुनी गति से बढ़ने लगा है.
चिकित्सकों ने संभाली जिम्मेदारी,तो बढ़ता जा रहा मरीजों का विश्वास
वर्ष ::::ओपीडी मरीज::::आईपीडी मरीज
2020::::::4507 :::::::::::: 2451
2021::::::9784 :::::::::::: 4817
2022::::::14801 :::::::::::: 4736
2023:::::: 26550 :::::::::::: 11716
2024 :::::: 74158 ::::::::::: 31264
हमारे स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की खूबियां....!
- प्रतापनगर में स्थित कैंसर इंस्ट्रीट्यूट में होंगे 500 बैड
- वैसे तो प्रथम फेज का काम पूरा होने पर 2020 में शुरू किया गया अस्पताल
- लेकिन 2023 में जब एसएमएस से 80 फीसदी कैंसर वर्क किए गए SCI में शिफ्ट
- तो इंस्टीट्यूट में मरीजों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी, एक साल में ओपीडी 75 हजार पार
- इस साल के अंत तक दूसरे चरण का काम पूरा, जिसके बाद ये होगा राजस्थान का सबसे बड़ा कैंसर सेंटर
- किसी भी राज्य सरकार के अधीन संचालित कैंसर हॉस्पिटल की श्रेणी में ये होगा सबसे बड़ा इंस्टीट्यूट
- पूरे देश की बात की जाए तो भारत का तीसरा सबसे बड़ा कैंसर हॉस्पिटल होगा SCI
स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में मिल रही ये सेवाएं....!
- कैंसर के सभी विभागों जैसे मेडिकल, सर्जिकल, रेडियोथेरेपी, पेलीएटीव मेडिसन, न्यूक्लियर मेडिसन की सुविधा
- पैथालॉजी, बायोकैमेस्ट्री, माइक्रोबाइलॉजी, ब्लड बैंक के अलावा मेमोग्राफी, एक्सरे, सोनोग्राफी, पैट स्कैन की सुविधा
- अत्याधुनिक तकनीक के मेडिकल आईसीयू, सर्जिकल आईसीयू, ओटी, पीडियाट्रिक वार्ड, ल्यूकेमिया लिम्फोमा वार्ड की सुविधा
- मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत राजस्थान के सभी मरीजों को मिल रहा फ्री इलाज
- राजस्थान का अग्रणी श्रेणी का ब्लड सेन्टर, जहां सबसे अधिक एसडीपी और स्टेम सेल कनेक्शन किए जाते है
प्रथम फेज के निर्माण के बाद ही स्टेट कैंसर इंस्ट्रीट्यूट शुरू तो कर दिया गया, लेकिन यहां अब दूसरे फेज में जारी छह मंजिला इमारत का काम मरीजों को कई बार दिक्कतें पैदा कर रहा है. निर्माणाधीन बिल्डिंग में खुद अस्पताल प्रशासन के सामने सेवाओं का निर्बाध संचालन बड़ी चुनौती है. ऐसे में कई बार मरीजों को पेयजल, सफाई समेत कई दिक्कतें झेलनी भी पड़ रही है. हालांकि, इस बारे में अस्पताल अधीक्षक डॉ संदीप जसुजा का कहना है कि जल्द ही बिल्डिंग का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा. साथ ही इक्यूपमेंट पर्चेजिंग का काम भी युद्ध स्तर पर जारी है. ऐसे में उम्मीद है कि इस साल के अंत तक अस्पताल पूरी तरह से रन करने लगेगा.