जयपुरः कहते हैं कि यदि हौसला आसमान सा हो तो फिर विधाता का क्रूर मजाक भी बौना साबित हो जाता हैं. हौसलों की कुछ ऐसी ही उडान आज उदयपुर के शिल्पग्राम स्थित दर्पण सभागार में देखने को मिली जहाँ अभिलाषा विशेष विद्यालय के करीब 80 से ज्यादा स्पेशली एवील्ड बालक-बालिकाओं नें सिहांसन बत्तीसी नाटक का मंजन कर मौजूद दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया. तो आईये आपको भी रुबरु कराते हैं इन अनूठे फनकारों की अदाकारी से जो बोल-सुन नही सकते.
लाइट,कैमरा और एक्शन की दुनिया में जहाँ डायलाँग और संगीत सबसे महत्वपूर्ण होता हैं उस मंच पर बोल-सुन नही सकने वाले बच्चे अपने हुनर का प्रर्दशन करें तो मौजूद दर्शकों का अंचभित होना लाजमी हो जाता हैं. कुछ ऐसा ही नजारा आज शिल्पग्राम के दर्पण सभागार का था जहाँ अभिलाषा बिशेष विद्यालय के बालक-बालिकाओं नें सम्राट विक्रमादित्य की कहानियों के नाटक सिंहासन बत्तीसी का मंचन किया. इस नाटक के मंचन में शामिल करीब 80 से ज्यादा ये अनूठे फनकार मूक-बधिर और विमंदित थे लेकिन चकाचौंध रोशनी और संगीत के बीच साइन लैग्वेंज के साथ इन बच्चो का प्रर्दशन किसी मझे हुए नाट्य कलाकार से कम जान नही पड रहा था.दरअसल इन बच्चो को करीब 6 महिनें तक जयपुर की रेनबो थियेटर संस्था नें प्रशिक्षण देकर तैयार किया. संस्था से जुडे नाटक के डायरेक्टर सिराज अहमद नें बताया कि सबसे पहला टास्क बच्चो को कहानी समझाना था जिसके लिए उनकी पूरी टीम नें साइन लेग्वेंज सीखी औऱ फिर इन बच्चो को समझाया. इसके लिए टीम नें कडी मेहनत की जिसका परिणाम नाटक के मंचन के दौरान देखने को मिला.
80 से ज्यादा बच्चों ने इस कार्य को अंजाम दिया:
दरअसल इस नाटक में सिंहासन बत्तीसी की 5 महत्वपूर्ण कहानियों को लिया गया.अभिलाषा विशेष विद्यालय की रेणु सिंह नें बताया कि इस नाटक में करीब 80 से ज्यादा बच्चों ने बेहत्तरीन संयोजन के साथ इस कार्य को अंजाम दिया.यही नही इस आयोजन का बडा मकसद समाज में ऐसे बालक-बालिकाओ के प्रति लोगो के नजरिये में बदलाव लाना हैं.
कुल मिलाकर यह आयोजन समाज में बिशेषजनों के प्रति दया भाव छोड उन्हें जीवन जीने की दिशा में मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण संदेश दे गया.यही नही लेकसिटी में आने वाले कई बर्षों तक इस अनूठे नाट्य मंचन को याद किया जाता रहेगा.