जयपुर : सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण पर कई सवाल उठ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल बाघ एसटी 29 'तिलक' के रेडियो कॉलर के गुम होने से जुड़ा है. बाघ टी 113 को 16 अक्टूबर 2022 को रणथंभौर से सरिस्का शिफ्ट किया गया था, और वहां उसे एसटी 29 नाम दिया गया.
तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर (FD) आरएन मीणा और डीसीएफ देवेंद्र जगावत की देखरेख में बाघ की शिफ्टिंग हुई थी. बाघ को तीन दिन तक एंक्लोजर में रखने के बाद 20 अक्टूबर 2022 को खुले जंगल में छोड़ा गया था. बाघ एसटी 29 का विचरण पानी ढाल और लॉज क्षेत्र में रहा, लेकिन 8-10 दिन पहले उसका रेडियो कॉलर गले से निकलकर जंगल में गिर गया.
सरिस्का प्रबंधन ने अभी तक कॉलर को रिकवर नहीं किया. FD संग्राम सिंह कटियार ने कहा कि डेढ़ वर्ष से रेडियो कॉलर खराब था. बड़ा सवाल ये है कि 'डेढ़ वर्ष से कॉलर खराब तो फिर इस बाघ की मॉनिटरिंग कैसे की जा रही थी? ST-29 को 16 अक्टूबर 2022 को शिफ्टिंग से पहले कॉलर लगाया गया था.
यानी करीब 28 महीने पहले लगाया था कॉलर और 13 महीने बाद ही खराब हो गया. ऐसे में रेडियो कॉलर की गुणवत्ता व उपयोगिता दोनों पर ही सवाल खड़े होते हैं. किस कंपनी का था कॉलर ? कहां से हुई थी खरीद और कब से सिग्नल नहीं मिल रहे थे ? क्या इन तमाम सवालों पर वन मंत्री संजय शर्मा लेंगे कोई ठोस एक्शन ?
हैरानी की बात यह है कि इस घटना के बाद भी फील्ड बायोलॉजिस्ट और डीसीएफ ने इस मामले की जानकारी सार्वजनिक नहीं की. सवाल यह उठता है कि रेडियो कॉलर गिरा कैसे? और कब से रेडियो सिग्नल नहीं मिल रहे थे?
इस घटना पर कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं होने से सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. यह घटना बाघों की सुरक्षा और उनकी निगरानी के बारे में गंभीर चिंता उत्पन्न करती है.