अलवरः अलवर जिले में जैविक उद्यान (बायोलॉजिकल पार्क) की स्थापना के लिए कार्य तेज़ी से चल रहे हैं. राजस्थान सरकार ने इस परियोजना की घोषणा बजट घोषणा संख्या 46(V) में की थी, जिसमें जैविक उद्यान के लिए 25 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है. यह उद्यान अलवर जिले के कटी घाटी, भूगोर क्षेत्र में स्थित होगा, जिसका कुल क्षेत्रफल 93 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है. इस क्षेत्र में 65 हेक्टेयर वन भूमि और 28 हेक्टेयर राजस्व भूमि शामिल है.
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने 12 नवंबर को जैविक पार्क कटी घाटी, भूगोर की व्यवहार्यता को मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी के साथ ही जैविक उद्यान के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. इसके तहत पार्क में विभिन्न वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण में रहकर संरक्षित किया जाएगा और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा. उपवन संरक्षक राजेंद्र हुड्डा ने बताया कि जैविक उद्यान की स्थापना के लिए 28 हेक्टेयर अतिरिक्त राजस्व भूमि वन विभाग को हस्तांतरित की जानी चाहिए, जैसा कि केंद्रीय भू-आबंटन प्राधिकरण की अनुशंसा में उल्लेख किया गया है. इसके लिए जिला कलेक्टर, अलवर को 15 नवंबर 2024 को पत्र लिखकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है. भूमि आवंटन का आदेश अब प्रक्रियाधीन है और जल्द ही इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है.
डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) और बजट आवंटन
जैविक उद्यान के विकास के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. इसके लिए सीसीएफ, जयपुर को 15 नवंबर 2024 को पत्र भेजा गया था, जिसमें डीपीआर के लिए बजट की मांग की गई है. फिलहाल, डीपीआर बजट आवंटन हेतु सरकारी स्तर पर लंबित है. जैसे ही बजट आवंटित होगा, डीपीआर तैयार करने का काम मार्च 2025 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है.
निविदा प्रक्रिया और निर्माण कार्य
डीपीआर स्वीकृत होने और बजट आवंटित होने के बाद, निविदा प्रक्रिया मई 2025 तक पूरी होने की संभावना है. निविदा प्रक्रिया के बाद, जैविक उद्यान के निर्माण कार्यों की शुरुआत की जाएगी. विशेषज्ञों के अनुसार, जैविक पार्क से संबंधित सभी कार्य वर्ष 2025-26 और 2026-27 के भीतर पूरा होने की उम्मीद है.
प्राकृतिक वातावरण में संरक्षण और पर्यटकों के लिए आकर्षण
इस जैविक उद्यान के बनने से न केवल क्षेत्रीय वन्यजीवों के संरक्षण में मदद मिलेगी, बल्कि यह पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षण केंद्र बनेगा. उद्यान में विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु, पक्षी और पौधों की प्रजातियाँ देखने को मिलेंगी, जिन्हें प्राकृतिक परिवेश में संरक्षित किया जाएगा. इसके साथ ही यह क्षेत्र जैव विविधता को बढ़ावा देने में भी सहायक होगा.
राज्य और केंद्र सरकार का सहयोग
राजस्थान सरकार की ओर से जैविक उद्यान के विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य सरकार का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा. जैविक उद्यान की स्थापना से जहां एक ओर वन्यजीवों का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा क्योंकि यह पर्यटकों को आकर्षित करेगा और रोजगार के अवसर प्रदान करेगा.
अलवर जिले में जैविक उद्यान की स्थापना से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि यह राजस्थान के वन्यजीव संरक्षण में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. इसके सफल क्रियान्वयन के बाद, यह उद्यान राज्य और देश के वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक प्रमुख स्थल बन जाएगा