जयपुरः अलग-अलग लैंड यूज वाले भूखंडों के मालिकों के लिए राहत की खबर है. जेडीए ने मामले में स्थिति स्पष्ट करने के लिए राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है. सरकार से मार्गदर्शन आने पर प्रदेश भर के ऐसे भूखंडों के मामले में यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन भूखंडों के लिए किस भू उपयोग का पट्टा जारी किया जाए.
किसी भी शहर के मास्टर प्लान या जोनल प्लान में ऐसी कई जमीनें आती हैं, जिनका एक नहीं बल्कि दो-दो लैंड यूज है. जमीन के एक हिस्से का लैंड यूज और दूसरे हिस्से का लैंड यूज अलग-अलग है. ऐसे ही कई मामले जेडीए रीजन में भी है. जयपुर विकास प्राधिकरण को ऐसी जमीनों का एकल पट्टा जारी करने के कई प्रकरण मिल रहे हैं. इन प्रकरणों में किस लैंड यूज का पट्टा जारी किया जाए. इसको लेकर जेडीए ने राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है. किस भूखंड पर कैसा होगा निर्माण, यह बिल्डिंग बायलॉज से होता है तय. जेडीए के बिल्डिंग बायलॉज में भी एक से अधिक लैंड यूज वाले भूखंडों के लिए प्रावधान तो हैं जेडीए अधिकारियों को मानना है इसके लिए राज्य सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण की जरूरती है. आपको सबसे पहले बताते हैं कि जेडीए में लागू बिल्डिंग बायलॉज में इन मामलों को लेकर क्या प्रावधान है
-बिल्डिंग बायलॉज के मुताबिक किसी भूखंड का कुल क्षेत्रफल के 60 प्रतिशत से कम भाग का व्यावसायिक/मिश्रित लैंड यूज है और
-भूखंड के शेष भाग का लैंड यूज आवासीय है तो
-ऐसी स्थिति में संपूर्ण भूखंड का मिश्रित लैंड यूज का पट्टा जारी किया जा सकेगा
-लेकिन भूखंड के जितने प्रतिशत भाग पर व्यावसायिक/मिश्रित लैंड यूज उतने भाग पर व्यावसायिक भू रूपांतरण के मुताबिक शुल्क लागू होंगे
-जितने प्रतिशत भाग का लैंड यूज आवासीय है उतने भाग पर आवासीय भू रूपांतरण के मुताबिक शुल्क लागू होंगे
-भवन मानचित्र स्वीकृति में भी कुल प्रस्तावित बीएआर (बिल्ड एरिया रेशियो) में से भी उसी अनुपात में व्यावसायिक व आवासीय निर्माण किया जा सकेगा
-ऐसे भूखंडों के जारी पट्टे व साइट प्लान में भूखंड के अलग-अलग हिस्से में दोनों लैंड यूज का उल्लेख किया जाएगा
जेडीए अधिकारियों के मुताबिक बिल्डिंग बायलॉज में केवल व्यावसायिक/मिश्रित लैंड यूज और आवासीय लैंड यूज के मामले में ही मिश्रित लैंड यूज का पट्टा देने का प्रावधान है. लेकिन इसके अलावा जिन भूखंडों अन्य लैंड यूज, उनको लेकर प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं. आपको बताते हैं कि इन मामलों को लेकर जेडीए ने राज्य सरकार से क्या मार्गदर्शन मांगा है.
-जेडीए सचिव की ओर से नगरीय विकास विभाग को पत्र भेजा गया है
-पत्र भेजकर जेडीए ने मार्गदर्शन मांगा है कि
-मास्टर प्लान/जोनल प्लान में किसी भूखंड का केवल आवासीय और व्यावसायिक/मिश्रित लैंड यूज होने पर ही मिश्रित लैंड यूज का ही पट्टा जारी किया जा सकता है
-अथवा भूखंड के कोई भी दो लैंड यूज होने पर भी मिश्रित लैंड यूज का पट्टा जारी किया जा सकता है
-राज्य सरकार अगर स्पष्ट कर देती है कि भूखंड के कोई भी दो लैंड यूज होने पर मिश्रित लैंड यूज का पट्टा दिया जा सकता है तो
-दोनों लैंड यूज के अनुपात में ही आवेदक को भूखंड के उपयोग की स्वीकृति दी जा सकेगी
-साथ ही राज्य सरकार का स्पष्टीकरण जेडीए ही नहीं बल्कि प्रदेश के दूसरे शहरों में होगा लागू