VIDEO: कृषि भूमि की तर्ज पर शहरी भूमि की भी तैयार होगी जमाबंदी, देशभर में 18 फरवरी से शुरू होगा नक्शा पायलट प्रोजेक्ट, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: केन्द्र सरकार के डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के तहत नक्शा पायलट प्रोजेक्ट की 18 फरवरी को देशभर में शुरूआत की जाएगी. प्रदेश में नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरूआत करेंगे. आखिर क्या है यह नक्शा पायलट प्रोजेक्ट और इससे देश व प्रदेश की शहरी आबादी को किस तरह मिलेगा फायदा.

केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने वर्ष 2016 में डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोगाम (DILRMP)की शुरूआत की थी. इस प्रोगाम का उद्देशय देश में भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण के साथ रिकॉर्ड का रियल टाइम अपडेशन भी है. इस प्रोगाम के तहत देश भर के समस्त राजस्व ग्रामों के खसरा मानचित्रों को जीआईआस आधारित कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि के खसरों के संधारण व आधुनिकीकरण के लिए केन्द्र सरकार की ओर से स्वामित्व योजना शुरू की गई है. इसी कड़ी में देश के शहरी क्षेत्रों की जमीनों के रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के लिए केन्द्र सरकार की ओर से नक्शा पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है. इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए देशभर के 152 शहरों का चयन किया गया है. इनमें राजस्थान के दस शहर शामिल हैं. 

इनमें भिवाड़ी, किशनगढ़ (अजमेर), ब्यावर, सवाई माधोपुर, जैसलमेर, पुष्कर, बहरोड, नाथद्वारा और नवलगढ़ शहर शामिल है. राष्ट्रीय स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा संचार राज्य मंत्री डॉ चन्द्रशेखर पेम्मसानी द्वारा किया जाएगा साथ ही, राज्य स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा द्वारा किया जाएगा. आपको बताते हैं इस नक्शा पायलट प्रोजेक्ट में किस तरह शहरी भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा.

यूं होगा शहरी भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार
-सर्वे ऑफ इंडिया के माध्यम से ड्रोन सर्वे करवाकर शहरों का जीआईएस आधारित ऑर्थोरेक्टिफाइड मानचित्र तैयार किया जाएगा.
-प्रदेश के दस शहरों में लगभग 410 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का ड्रोन सर्वे और भौतिक सर्वे किया जाएगा.
-इसके लिए विभिन्न निकायों में कुल 114 सर्वे टीमों का गठन किया जाएगा.
-ये टीमें चार महीनों में प्रत्येक संपत्ति का सर्वे कर रिकॉर्ड तैयार करेंगी.
-निजी भवन,भूखंड,सरकारी कार्यालय,सड़क पार्क,खाली भूमि आदि का ड्रोन,जीएनएसएस व रोवर की सहायता से मौका निरीक्षण कर संपत्ति की सही माप ली जाएगी.
-पायलट प्रोजेक्ट के तहत सर्वे करने व सर्वे उपकरणों की खरीद पर 12 करोड़ रुपए खर्च होंगे.
-जिन संपत्तियों के दस्तावेज निकाय में या राजस्व रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं.
-उनके वैध दस्तावेजों के आधार पर स्वामित्व का निर्धारण कर प्रोपर्टी रजिस्टर तैयार किया जाएगा.
-इस सर्वे का मानचित्र प्रकाशित कराकर आमजन से आपत्ति प्राप्त की जाएगी.
-आपत्तियों की नियमानुसार सुनवाई कर स्वामित्व का प्रमाणीकरण किया जाएगा.
-प्रोजेक्ट के तहत एकीकृत भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली तैयार की जाएगी.
-प्रत्येक भूमि के टुकड़े को एक विशेष पहचान संख्या दी जाएगी.
-इसी पहचानसंख्या के आधार पर भूमि रिकॉर्ड को अपडेट किया जाएगा.
-भूमि के खरीद-बेचान की रजिस्ट्री होते ही निकायों में भी नाम हस्तांतरण रियल टाइम में अपडेट होगा.

विशेषज्ञ बताते हैं कि भूमि के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से संग्रहित कर पारदर्शिता को बढ़ाया जा सकेगा. इससे भूमि विवादों को भी सुलझाने में मदद मिलेगी. वर्तमान में आधा-अधूरा रिकॉर्ड होने के चलते निकायों की ओर से नगरीय विकास कर की पूरी वसूली नहीं हो पाती है. इस प्रोजेक्ट से इस कर के पेटे निकायों का राजस्व बढ़ेगा. आपको बताते हैं कि इस नक्शा पायलट प्रोजेक्ट के शहरी आबादी को क्या फायदे मिलेंगे.

प्रोजेक्ट के फायदे
-इस प्रोजेक्ट से राजस्व ग्रामों की तर्ज पर शहरी भूमि की भी जमाबंदी तैयार की जाएगी.
-हर संपत्ति को यूनिक आईडी मिलने से स्वामित्व की सुनिश्चित्ता होगी.
-संपत्ति का अधिकार प्रोपर्टी रजिस्टर में अंकित होगा.
-कौनसी संपत्ति का स्वामित्व किसका है, यह पता लगाना आसान होगा.
-निकायों को विकास कार्यों की योजना तैयार करने में आसानी होगी.
-संपत्ति के आकार और उसके अनुसार नगरीय विकास कर की गणना करना आसान होगा.
-जमीनी सौदों में धोखाधड़ी से बचाव होगा.
-अवैध निर्माण व अतिक्रमणों की पहचान कम समय में आसानी से हो सकेगी.
-योजना के तहत डिजिटल एलिवेशन मॉडल का निर्माण किया जाएगा.
-इसके चलते ड्रैनेज प्लान,सीवर लाइन व पेयजल लाइन प्रोजेक्ट और बाढ़ प्रबंधन की योजना बनाना आसान होगा.