जयपुरः लोकसभा चुनाव में 99 सीट मिलने से उत्साहित कांग्रेस का अब एक बार फिर राज्यों में लगातार ग्राफ गिरता जा रहा है. लोकसभा चुनाव के बाद पिछले 8 माह में पांच राज्यों में चुनाव हुए हैं. इन राज्यों की टोटल 624 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस ने 328 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ 75 सीटें जीती. हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में कांग्रेस की करारी हार हुई. झारखंड और जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस गठबंधन सरकार का हिस्सा है.
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सीटों की संख्या 52 से बढकर 99 हो गई थी. वहीं भाजपा 240 सीटों पर सिमट गई थी और उसे अकेले दम पर बहुमत नहीं मिला था. तब सियासी रुप से माहौल कांग्रेस के पक्ष में नजर आने लगा था. लेकिन कांग्रेस पार्टी इस मोमेंटम को बरकरार नहीं रख पाई. लोकसभा चुनाव के बाद अब तक 5 राज्यों में चुनाव हुए हैं.लेकिन कांग्रेस की अपने दम पर किसी भी राज्य में सरकार नहीं बनी.
-कांग्रेस का गिरता ग्राफ-
लोकसभा चुनाव के बाद 5 राज्यों में चुनाव हुए
हरियाणा,महाराष्ट्र,झारखंड,दिल्ली,जम्मू कश्मीर में चुनाव हुए
कांग्रेस ने दिल्ली औऱ हरिय़ाणा में अकेले चुनाव लड़ा फिर भी सरकार नहीं बनी
महाराष्ट्र में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा फिर भी हार खाते में आई
झारखंड औऱ जम्मू कश्मीर में कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा है
इन 5 राज्यों की 624 सीटों में कांग्रेस ने 328 पर चुनाव लडा औऱ 75 सीट मिली
कांग्रेस कार्यकर्ता यकीनन निराश और हताशः
कांग्रेस की लगातार हार से कांग्रेस कार्यकर्ता यकीनन निराश और हताश है. 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का माहौल बनने के दरअसल कईं कारण थे. जैसे संविधान बदलने औऱ आरक्षण समाप्त करने का कांग्रेस नेरेटिव बनाने में कामयाब हो गई थी. इंडिया गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने से सहयोगी दलों के उसे वोट मिल गए. उधर भाजपा ने बहुमत नहीं मिलने पर मंथन करते हुए अपनी रणनीति में बदलाव किया. हिन्दुत्व के मुद्दे पर फिर आक्रामक हो गई. साथ ही स्टेट के वरिष्ठ नेताओं औऱ मु्द्दों के बलबूते चुनाव में उतरी. वहीं कांग्रेस संविधान बदलने के पुराने एजेंडे पर ही वोट इन राज्यों के चुनावों में मांगती रही. कांग्रेस को यह बिल्कुल समझ नहीं आया कि संविधान बदलने औऱ आरक्षण समाप्त करने जैसे कोई मुद्दे सिर्फ एक चुनाव में चल सकते हैं.
कांग्रेस का अकेले कोई जनाधार नहींः
अब अगले दो साल में बिहार,बंगाल,केरल,तमिलनाडु,असम औऱ पुड्डचेरी जैसे 6 राज्यों में चुनाव है. कांग्रेस को इनमें से सिर्फ केरल औऱ असम के चुनाव से उम्मीदें है. बाकी चार राज्यों में कांग्रेस का अकेले कोई जनाधार नहीं है.दरअसल अब कांग्रेस को अपनी सियासी रणनीति में बदलाव करना होगा. उसे सबसे पहले यह स्टेंड लेना होगा कि अब अकेला चलो की रणनीति अपनानी है या गठबंधन के साथ लड़ना है. साथ ही संगठन में भी बड़े बदलाव अब कांग्रेस को करने होंगे.